Kahani Bhooton ka Agent

क्या शैतान सच में होते हैं

क्या शैतान सच में होते हैं

क्या सच में,
होते हैं शैतान ?
या ये है केवल,
हमारा अनुमान ।
हां वाकई,
होते हैं शैतान ।
जब हम करते हैं,
कोई बुरा काम ।
या फ़िर करते हैं,
बड़ों का अपमान ।
तब हमारे भीतर ही,
प्रविष्ट हो जाते हैं ;
ये दुष्ट शैतान ।
जब हम, भूल जाते हैं ,
सही ग़लत की पहचान ।
तभी हमें उकसाते हैं ,
ये हमारे भीतर के शैतान ।
जब भी हमें होता है,
अपनी सफलता का अभिमान ।
ये ही भर देते हैं,
हमारे अंतस में गुमान ।
जब कभी, हम परिवार में ।
लेते दिमाग से काम ।
बस उसी क्षण ,
दिखाई देते ;
हमें हमारे अंदर के शैतान !
हां हमारे भीतर ही,
निवास करते ये शैतान !

Pragati Dutt

प्रगति दत्त

यह भी पढ़ें :

Similar Posts

  • रामनवमी | Kavita

    रामनवमी ( Ram Navami )   ( 2 ) हाथी घोड़े ऊंट सज रहे रामनाम की जय जयकार रामनवमी पर्व सनातन खुशियों भरा आया त्योहार केशरिया ध्वज लहराये गूंज रहा है नारा श्रीराम हर हर महादेव स्वर गूंजे रामनाम बस राम ही राम झूम रहे हैं राम राम में राम सिवा नहीं कोई काम नगर…

  • एकता का सूत्र | Kavita Ekta ka Sutra

    एकता का सूत्र ( Ekta ka Sutra ) समय की पुकार को समझो और अपने आप को बदलो। हम इंसान है और इंसानो की इंसानियत को भी समझो। अनेकता में एकता को देखों आबाम की बातों को सुनों। शांति की राह को चुनो और शांति स्थापित करो।। देश दुनिया की बातें करते है अपने आप…

  • जीवन धारा | Kavita jeevan dhaara

    जीवन धारा ( Jeevan dhaara )   हर्ष उमंग खुशियों की लहरें बहती जीवन धारा। मेहनत लगन हौसला धरकर पाते तभी किनारा।   भावों की पावन गंगा है मोती लुटाते प्यार के। पत्थर को भगवान मानते सुंदर वो संस्कार थे।   इक दूजे पे जान लुटाते सद्भावों की पावन धारा। क्या जमाना था सुहाना बहती…

  • महेन्द्र सिंह प्रखर की कविताएं | Mahendra Singh Prakhar Poetry

    तेरे दर्शन को है प्यासा देख रहा हूँ राह तुम्हारी , आओ भोले नाथ ।तेरे दर्शन को है प्यासा , बालक यहाँ अनाथ ।। काशी जाऊँ मथुरा जाऊँ , जाऊँ तीरथ धाम ।वन वन खोजूँ तुम्हें पुकारूँ , लेकर तेरा नाम ।।द्वार सभी मैं गया तुम्हारे , देखो दीना नाथ ।तेरे दर्शन को है प्यासा…

  • बसंत पंचमी | Basant Panchami

    बसंत पंचमी ( Basant Panchami )   ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥ हो जाये हमारा जीवन साकार ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥ चहुँ और हो बसंत जैसी बहार जीवन बने सदैव सुखकार रहे निरामय हमारे विचार ऐसी करनी हम करते चले -2 ॥ध्रुव॥ निर्लिप्तता से जीवन जिये भार मुक्त हम खुद…

  • दीवानगी | Deewangee

    दीवानगी ( Deewangee )   शराब तो नहीं पीता मैं पर रहता हूं उसके नशे में चूर हरदम वह ऐसी चीज ही लाजवाब है कि नशा उतरता ही नहीं बड़ी हसीन तो नहीं पर दीवानगी का आलम यह कि सर से पांव तक भरी मादकता से उतरती ही नहीं सोच से पूरी कायनात भी फीकी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *