Ek hi Mudda

एक ही मुद्दा | Ek hi Mudda

एक ही मुद्दा

( Ek hi Mudda )

 

रोज रोज रोज एक ही मुद्दा

हमें रोजगार चाहिए।

शासन सुशासन चाहिए।

विद्या का दान चाहिए।

भूखमरी पर रोकथाम चाहिए।

हमें सिर्फ रोजगार चाहिए।

हिंदुस्तान का प्रत्येक

व्यक्ति शिक्षावान चाहिए।

बढ़ती गरीबी पर अंकुश चाहिए।

युवाओं का भविष्य शानदार चाहिए।

न धर्म पर, न जातिवाद

पर कोई विवाद चाहिए।

घर घर रोजगार चाहिए

 

लेखिका :- गीता पति ‌(प्रिया)

( दिल्ली )

यह भी पढ़ें :-

देव भूमि की सैर | Poem dev bhoomi ki sair

Similar Posts

  • अस्तित्व की लड़ाई | Astitva kavita

    अस्तित्व की लड़ाई ( Astitva ki ladai ) ***** सूखी टहनियों सा मैं हो गया हूं नाज़ुक हल्का और कमजोर ज्यादा ना लगाओ तुम मुझ पर अपना ज़ोर टूट जाऊंगा बन तिनका बिखर जाऊंगा तेरे किसी काम अब न आ पाऊंगा सिवाए जलावन के ले आओ माचिस और मटिया तेल खत्म कर दो सारा यह…

  • डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर | Dr. Bhimrao Ambedkar par Kavita

    डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ( Dr. Baba Saheb Bhimrao Ambedkar )   देश विदेश में बुद्धजीवियों के मध्य बाबा साहेब ने धाक जमाया था देश विदेश के विश्व विद्यालयों से सबसे सर्वोच्च बहुत डिग्री पाकर शिक्षा के क्षेत्र में प्रसिद्धि पाया था भारत में जारी छुआछूत,असमानता को दूर भगाया था दलितों,पिछड़ों, गरीब सवर्णों और…

  • मेरी संस्कृति | Poem meri sanskriti

    मेरी संस्कृति ( Meri sanskriti )   है अलग मेरी संस्कृति नहीं उसमें कोई विकृति चुटकी भर सिंदूर तेरा मौन मेरी स्वीकृति गरिमा बढ़ाती लाल बिंदिया। विदेशी कर रहे अनुकृति पायलेे पैरों में मेरे सुनो उसकी आवृत्ति तुलसी पर जल चढ़ाएं यही हमारी प्रकृति रिश्तो की प्यारी प्रक्रिया फैला रही है जागृति हार जाए तो…

  • सूर्य नमस्कार | Surya Namaskar

    सूर्य नमस्कार ( Surya Namaskar )   आरोग्य अनुपमा, सूर्य नमस्कार से ******** सुख समृद्ध जीवन पथ, स्वस्थ तन मन अति महत्ता । उत्तम पावन विचार उद्गम, दिव्य स्पंदन परम सत्ता । अद्भुत ओज बिंब सूर्य देव, मूल विमुक्ति सघन अंधकार से । आरोग्य अनुपमा, सूर्य नमस्कार से ।। द्वादश सहज आसन चरण, अंतर्निहित अनूप…

  • मॉं शारदे, विद्या, विवेक मान दो

    मॉं शारदे, विद्या, विवेक मान दो माँ शारदे, विद्या विवेक मान दो,मुझे सुर साम्राज्ञी जैसी तान दो।मेरा वाचन दिव्यमयी हितकारी हो,माँ शारदे, ब्रह्माणी ये वरदान दो।टेक। मेरे सिर-माथे वरद हस्त रख दो,सुमन शब्द-अक्षर ज्ञान-मख दो।प्रतिभा स्वयं,पर अल्पज्ञ मूरख हूँमाँ-कल्याणकारी शुभम कर दो ।पूजा अर्चन करूॅ तेरी आराधना,नारियाँ हों सशक्त,स्वाभिमान दो।माँ शारदे विद्या विवेक मान दो,मुझे…

  • श्रीगंगा-स्तुति

    श्रीगंगा-स्तुति (गंगा दशहरे के शुभ अवसर पर)   जगत् पावनी जय गंगे। चारों युग त्रिलोक वाहनी त्रिकाल-विहारिणी जय गंगे।।   महा वेगवति, निर्मल धारा, सुधा तरंगिनी जय गंगे। महातीर्था, तीर्थ माता , सर्व मानिनी जय गंगे।।   अपारा, अनंता, अक्षुण्ण शक्ति, अघ-हारिणी जय गंगे। पुण्य-मोक्ष-इष्ट प्रदायिनि, भव-तारिणी जय गंगे।।   “कुमार”मन पावन करो ,शिव जटा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *