Kavita Holi ki Halchal

होली की हलचल | Kavita Holi ki Halchal

होली की हलचल

( Holi ki Halchal )

 

रंग -रंगीली होली आई
रंगों की बौछार लाई
उमंग की उफान उठाई
उल्लास दिल में उगाई
मजीर मन में बजाई
बढ़उ देवर को बनाई

रंगों की फुहार में
भींगी है राधा कान्हां संग
टेसू की बौछार में
बौराया है बरसाना सारा
डफ-मजीरे की थाप पर
डूबा है ऋतुराज मदमस्त

गांव-गली -नगर अब
उड़त अबीर गुलाब
बाल-वृदध नर-नारी सब
होयत लालसिंह लाल

होरी हारे अब मस्ती भरे
करते हैं हुडदंग मलंग
हुड़ार खोजत हुड़ारिनी
दहारत दिन-दहारे पड़त पीछे ।

Shekhar Kumar Srivastava

शेखर कुमार श्रीवास्तव
दरभंगा( बिहार)

यह भी पढ़ें :-

पर्व पर गर्व | Kavita Parv par Garv

Similar Posts

  • मैं हूॅं फौजी | Fauji par kavita

    मैं हूॅं फौजी ( Main hoon fauji )      मैं हूॅं फौज का एक फीट जवान, करता में देश की सुरक्षा जवान। डयूटी में नहीं लापरवाहीं करता, दिन व रात यह डयूटी में करता।।   हजार रुपए मुझे रोज़ है मिलता, फ़ौज में सबको मौज यह रहता। थोड़ा बहुत यें ग़म भी हमें रहता,…

  • कर्मगति | Kavita karmagati

    कर्मगति ( Karmagati )   वैतरणी पार करोगे कैसे, मन की छुदा मिटे ना। तरेगा कैसे जनम मरण जब,मन से पाप मिटे ना। इतना ज्ञानी हो होकर के भी,मोहजाल में लिपटा है, मिटेगा कैसे ताप बताओ, जब तन प्यास मिटे ना। वैतरणी पार करोगे कैसे…..   मुख से राम भजा पर मन में,तेज कटारी रखता…

  • हमारे वृद्ध | Hamare Briddh

    हमारे वृद्ध ( Hamare Briddh )    बुजुर्गों के हाथ आशीर्वाद के लिए उठे तो अच्छे लगे यह दौलत, शोहरत ,नाम यही छूट जाना है रहना है सिर्फ इंसानियत और इंसान यह चिंतन मनन और मंथन अनुभव, तजुर्बा, गहनता वृद्ध फलदार वृक्ष की तरह हंसते, मुस्कुराते आशीष देते तटस्थता, सहजता, सरलता प्रकृति से सब कुछ…

  • काश वो भी याद करें | Kaash Shayari in Hindi

    काश वो भी याद करें ( Kash wo bhi yaad kare )   अक्सर वो सपनों में रहते उनसे हम फरियाद करे। दिल तक दस्तक देने वाले काश वो भी याद करें।   हम तो उनके चाहने वाले मधुर सुहानी बात करें। आ जाए वो भी महफ़िल में मस्तानी प्रभात करें।   यादों में सौम्य…

  • मेरी दिली अभिलाषा | Prem Kavita Hindi

    मेरी दिली-अभिलाषा ( Meri dili abhilasha )    कुछ रूठा-रूठा लगता है ओ मन करता है उसे मनाऊं मीठी-मीठी बात करूॅं और उसके मन को बहलाऊं मानकर सारी हठ उसकी मैं जो चाहे वो उसे मगाऊं अर्पण कर मैं खुदको उसमें प्रेम-प्रीत इस भांति निभाऊं सूरज चंदा तारे-वारे आसमान से तोड़ लाऊं इटली,डोसा पिज़्ज़ा-उज्जा जो…

  • चिंता की रेखाएं | Chinta par kavita

    चिंता की रेखाएं ( Chinta ki rekhayen )   जीवन पथ है सरल,सरस कोमल किसलय सा फिर मधुर जीवन क्यों ,हो जाता है विषमय सा   खिच जाती है आर ,पार जीवन के पथ पर दिख जाती है खिंची, तनी उभरी मस्तक पर   कहती करुण असहन, वेदना मनुष्यता का जीवन-सुख बिनु तड़प, तड़प मन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *