Galti Hamari thi

ग़लती हमारी थी | Galti Hamari thi

ग़लती हमारी थी

( Galti hamari thi )

 

हुआ जो हादसा ए इश्क़ वो गलती हमारी थी
खड़ी सरकार के हक़ में लड़ी आवाम सारी थी।

लगेंगी तोहमतें हम पर बहुत ये इल्म़ था हमको
वही अच्छे वही सच्चे हमें ये जानकारी थी।

वफ़ा करके भी हम हरदम खटकते हैं नज़र में क्यूं
यही अफ़सोस की किस्मत में अपनी ख़ाकसारी थी।

समझना ही नहीं आया कभी हमको किसी को भी
नहीं फितरत में जाने क्यूं हमारे होशियारी थी।

न पूछो कैफ़ियत अपनी बड़े बेकैफ़ से दिन हैं
टटोला दिल वहां पाया बड़ी ही बेक़रारी थी।

लगा दी उम्र पर उनको नहीं अपना बना पाई
दिखी थी उन निगाहों में ज़रा बेऐतबारी थी।

नयन अब भूलना ही ठीक जो गुज़री जहां गुज़री
बयां वो दर्द मत करना कि जिसकी राज़दारी थी।

 

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

बहुत कम दिन हुए यारों | Kam Din Hue

Similar Posts

  • सोच में डूबा दिल है | Soch mein Dooba Dil hai

    सोच में डूबा दिल है ( Soch mein dooba dil hai )   सर पर रोज़ खड़ी मुश्किल है हर पल सोच में डूबा दिल है ज़ख्म मिले ऐसे अपनों से दिल रहता हर पल बेदिल है कांटों ने घेरा है ऐसा फूल न उल्फ़त का हासिल है पहरा है इतना दुख का ही हाँ…

  • घर को संभाले | Ghazal Ghar ko Sambhale

    घर को संभाले ( Ghar ko Sambhale ) इस दिल को बता तू ही करूँ किसके हवाले अब तेरे सिवा कौन मिरे घर को संभाले इक बात ही कहते हैं यहाँ आके पड़ोसी जब तुम थे बरसते थे यहाँ जैसे उजाले मेरे ही तबस्सुम से तिरा रूप खिला है तू अपनी निगाहों के कभी देख…

  • मैं भी था | Main Bhi Tha

    मैं भी था तुम्हारे हुस्न-ओ-अदा पर निसार मैं भी थातुम्हारी तीर-ए-नज़र का शिकार मैं भी था मेरे गुनाह ख़ताएं भी फिर गिना मुझकोतेरी नज़र में अगर दाग़दार मैं भी था बहुत ही ख़ौफ़ ज़माने का था मगर सचमुचतुम्हें भी अपना कहूँ बेकरार मैं भी था यक़ी न होगा तुझे पर यही हक़ीक़त हैहसीं निगाहों का…

  • ज़िंदगी के वास्ते | Ghazal Zindagi ke Vaaste

    ज़िंदगी के वास्ते ( Zindagi ke Vaaste ) जब इजाज़त उसने मांगी रुख़सती के वास्ते। कह दिया हमने भी जा,उसकी ख़ुशी के वास्ते। तीरगी फिर भी न मिट पाई हमारे क़ल्ब की। फूंक डाला घर भी हमने रोशनी के वास्ते। आग को पानी करे है और पानी को धुआं। आदमी क्या-क्या करे है ज़िंदगी के…

  • जिक्र होता रहा सियासत का

    जिक्र होता रहा सियासत का   जिक्र होता रहा सियासत का औ दिखावा किया हिफ़ाजत का दिल मे पाले रहे सदा नफरत और बहाना किया सदाकत का जुल्म पर जुल्म की बरसात हुई ढोंग चलता रहा सलामत का पास तो बैठे थे वो पहलू में जज्बा पाले हुए अदावत का मेरे ही संग उनकी साँसे…

  • ह़ाजत तुम्हारी | Ghazal Hajat Tumhari

    ह़ाजत तुम्हारी ( Hajat Tumhari ) मयस्सर हो गर हमको उल्फ़त तुम्हारी। करेंं हर घड़ी दिल से मिदह़त तुम्हारी। न छूटेगी अब हमसे संगत तुम्हारी। हमें हर क़दम पर है ह़ाजत तुम्हारी। हमारी शिकस्ता सी इस अन्जुमन में। मसर्रत की बाइ़स है शिरकत तुम्हारी। जहां भर की दौलत का हम क्या करें,जब। ख़ुशी दिल को…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *