Reet Duniya ki

रीत दुनिया की | Reet Duniya ki

रीत दुनिया की

( Reet Duniya ki )

 

बह्र का नाम: बहरे हज़ज मुसम्मन सालिम

अरकान: मुफाईलुन मुफाईलुन मुफाईलुन मुफाईलुन

मात्राएँ: 1222 1222 1222 1222

 

मिला जो इक दफा वो हर दफा मिलता नहीं यारों,
टूटा जो फूल डाली से कभी खिलता नहीं यारों !

लगा चाहे ले जितना ज़ोर लेकिन सच यही है की,
अगर जो हो गया खोटा पैसा चलता नहीं यारों !

खपानी जान पड़ती पेट भरने की जुगत में भी,
बिना महनत के घर चूल्हा कभी जलता नहीं यारों !

नेताओं की झूठीं बातों में आकर के कभी देखो,
गरीबों का फटा कुर्ता ज़ामा सिलता नहीं यारों !

कभी सवेरा कभी तो शाम होना रीत दुनिया की,
सूरज उगना किसी रोके कभी रुकता नहीं यारों !!

 

DK Nivatiya

डी के निवातिया

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निवातिया के हाइकु | Nivatiya ke Haiku

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