जब से देखी है | Jab se Dekhi Hai

जब से देखी है

( Jab se Dekhi Hai )

जब से देखी है पढ़कर ख़ुदा की किताब।
छोड़ दी हम ने तब से जफ़ा की किताब।

राहे ह़क़ से भटक जाओगे दोस्तो।
भूल कर भी न पढ़ना अना की किताब।

दिल कहीं पर भी लगता नहीं बाख़ुदा।
दूर जब से हुई वो वफ़ा की किताब।

औने-पौने भी आंखे दिखाने लगे।
बन्द की जब से हमने ख़ता की किताब।

बेह़याई से वो दूर रहने लगा।
जिसने दिल से लगाई ह़या की किताब।

बन्द है तब से हर इक मुदावा मिरा।
गुम हुई जब से मेरी दवा की किताब।

ग़र्क़ कर देगी इक रोज़ इज़्ज़त फ़राज़।
फेंक दो फेंक दो यह रिया की किताब।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

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