Ghazal Dil Lagate Lagate

दिल लगाते लगाते | Ghazal Dil Lagate Lagate

दिल लगाते लगाते

( Dil Lagate Lagate )

मुहब्बत में दिल को लगाते-लगाते,
भुला खुद को बैठे भुलाते-भुलाते !

कैसे हम बताये की कितना है हारे,
झूठा सा दिलासा, दिलातें-दिलातें !

गुजारे कई युग तेरी चाह रखकर,
कहाँ आ गए दिल दुखाते-दुखाते !

बंजर हो गए है ये नैना हमारे,
आँखों के ये आंसू छुपाते-छुपाते !

मुहब्बत का मुजरिम बताने लगे है,
वफाई को अपनी जताते-जताते !!

डी के निवातिया

डी के निवातिया

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