Ghazal Ishq Vishk

इश्क विश्क प्यार व्यार | Ghazal Ishq Vishk

इश्क विश्क प्यार व्यार

(Ishq Vishk Pyaar Vyaar)

 

इश्क विश्क प्यार व्यार सब बेकार बातें है,
मिलना जुलना कुछ वक्त की मुलाकातें है !

पानी के बुलबुले सी है चांदनी कुछ पल की,
उसके बाद सिर्फ तन्हा स्याह काली रातें है !

अपने-अपने स्वार्थ से जुड़ते है सब यहां पर,
मतलबी लोग, झूठे दुनिया के रिश्ते नाते है !

ख्वाबों ख्यालों जैसी रखते है फितरत लोग,
ना जाने कब में आते है कब में चले जाते है !

झूठी है दुनिया सारी, झूठे इनके फ़साने है,
किस पे करे भरोसा सब ‘धर्म’ राग गाते है !!

DK Nivatiya

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

सनम तुम | Ghzal Sanam Tum

Similar Posts

  • बहुत देखा | Bahut Dekha

    बहुत देखा ( Bahut Dekha ) भरी बज्म में उनको लाचार बहुत देखाबुझी आँखो में तड़पता प्यार बहुत देखा युँ तो हम भी हमेंशा रहे कायल उनकेबिना वजह के रहे शर्मसार बहुत देखा हमने कभी न देखा वादा खिलाफ होतेसामने आने में इंतजार बहुत देखा सामने सच ला न सकें झूठ बोला न गयामुहब्बत की…

  • एक दिलदार अपना | Ek Dildar Apna

    एक दिलदार अपना ( Ek Dildar Apna ) रखा है सहेजे हुए प्यार अपनाक़िताबों में गुल एक दिलदार अपना मुहब्बत कसौटी पे बिल्कुल ख़री हैतभी तो जताया है अधिकार अपना सनम देवता मैंने माना तुम्हीं कोकरो तुम भी इक रोज़ इज़हार अपना फ़लाने की बेटी सगी से भी बढ़करजो अस्मत लुटी दिल है बेज़ार अपना…

  • नये रंग भरने वाला था | Ghazal Naye Rang

    नये रंग भरने वाला था ( Naye Rang Bharne Wala Tha ) हमारा जाम मुहब्बत से भरने वाला था कोई उमीद की हद से गुज़रने वाला था जवाब उस से मुहब्बत का किस तरह मिलता वो गुफ़्तगू भी सवालों में करने वाला था ये एक बात ही ज़ाहिर है उसकी आंँखों से ज़रा सी देर…

  • फूल तितली सनम हुए बे-रंग

    फूल तितली सनम हुए बे-रंग क़ाफ़िया – ए स्वर की ‌बंदिश रदीफ़ – बे-रंग वज़्न – 2122 1212 22 फूल तितली सनम हुए बे-रंग इंद्रधनुषी छटा दिखे बे-रंग तेरी खुशबू जो ज़िंदगी से गई रात-दिन मेरे हो गए बे-रंग ये मुहब्बत सज़ा बनी है आज दौर-ए-हिज़्राँ लगे मुझे बे-रंग याद जब तेरी आती है मुझको…

  • रह गए हम | Rah Gaye Hum

    रह गए हम हम नज़र होते होते रह गए हमहमसफ़र होते होते रह गए हम शब में लगने लगा मुकम्मल हैऔर सहर होते होते रह गए हम हमने सोचा किसी के हो जाएँहाँ मगर होते होते रह गए हम बस कहानी थी यूँ तो कहने कोचश्मे-तर होते होते रह गए हम साथ हमने बाताए सात…

  • प्रकृति का अद्भुत श्रृंगार

    प्रकृति का अद्भुत श्रृंगार ( 2222 2222 222 )निर्मल गंगा सी धारा तुम बहती होशबनम के मोती जैसी तुम लगती हो चंद्रप्रभा रातों की सुंदरता में तुमआँचल बन कर फैली नभ में दिखती हो यूँ लगता है जैसे ऊँचे परबत सेकल-कल करती झरने जैसी बहती हो फूलों की कोमल पंखुड़ियों के जैसेभँवरे की प्रीती की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *