कहेगा कौन | Ghazal Kahega Kaun

कहेगा कौन

( Kahega Kaun )

ग़ज़ल में क़ाफ़िया उम्दा न शेरों में रवानी है
कहेगा कौन तेरी शायरी ये ख़ानदानी है

रखी है बाँध के सिर पे वही पगड़ी पुरानी है
कहें क्या आपसे ये तो बुज़ुर्गों की निशानी है

गया बचपन सुहाना आई है रंगी जवानी ये
न जादू की छड़ी कोई न परियों की कहानी है

न दिन में चैन ही मिलता न आती नींद रातों को
बड़ी है फ़िक्र वालिद को हुई बेटी सयानी है

गए जब से फ़िराक़-ओ-मीर इस दुनिया-ए-फानी से
सुख़न में पहले सी रौनक़ न ग़ज़लों में बयानी है

बिना उसकी रज़ा के शाख़ का पत्ता नहीं हिलता
ज़मीं में देखिए हर सू ख़ुदा की हुक्मरानी है

सुख़न की हर गली में चर्चा है मीना तुम्हारा पर
मियाँ ग़ालिब की ग़ज़लों का नहीं कोई भी सानी है

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

चाहने वाले कितने | Ghazal Chahane Wale

Similar Posts

  • मेरा वतन | Mera Watan

    मेरा वतन ( Mera watan )    गुलाबी सा बहुत मेरा वतन आज़म रहे इसकी सदा यूं ही फ़बन आज़म ख़ुदा से रोज़ करता हूँ दुआ मैं ये न हो दिल में किसी के भी दुखन आज़म अदावत के नहीं काँटें उगे दिल में मुहब्बत का रहे हर पल चलन आज़म फ़िदा मैं क्यों न…

  • बेमानी | Bemani

    बेमानी ( Bemani )   हक़ीक़त दिलों की यहाँ किसने जानी है, गहराई जितनी उतनी उलझी कहानी है। अक्सर सूरत में छिप जाते है किरदार वरन हर मुस्कुराते चेहरे की आँख में पानी है। अपने ही किस्से में मशगूल रहे इस कदर एहसासों की अनकही बातें किसने जानी है। हरी हो टहनी तो सह लेती…

  • मेरे ख़ुलूस को | Mere Khuloos ko

    मेरे ख़ुलूस को मेरे ख़ुलूस को चाहो अगर हवा देनामेरे ख़िलाफ़ कोई वाक्या सुना देना कभी तो आके मेरी ख़्वाहिशें जगा देनावफ़ा शियार हूँ तुम भी मुझे वफ़ा देना तमाम उम्र ये मंज़र रहेगा आँखों मेंनज़र मिलाते ही तेरा ये मुस्कुरा देना जिधर भी देखिए रुसवाइयों के पहरे हैंमेरे ख़ुतूत मेरे साथ ही जला देना…

  • आरज़ू के फूल | Aarzoo ke Phool

    आरज़ू के फूल ( Aarzoo ke Phool ) बिखरे हैं मेरे दिल में तेरी आरज़ू के फूलआकर समेट ले ये तेरी जुस्तजू के फूल।। ख़ुशबू हमारे वस्ल की, फ़ैली है हर जगहहर जा बिछे हुए हैं, यहाँ गुफ़्तुगू के फूल महफूज़ रक्खे दिल में तेरी चाहतें जनाबऔर याद जिसने बख़्शे ग़म-ए-सुर्ख़रू के फूल दिल का…

  • जो मुमकिन हो | Ghazal Jo Mumkin ho

    जो मुमकिन हो ( Jo Mumkin ho ) मिलो जिनसे कभी, लहजा नरम रखना, जमीं पर तुम सदा अपने कदम रखना ।। बहक जाए नहीं इकदाम इशरत मे, अदावत में ज़रा अपना करम रखना ।। मुलाक़ातों का होगा सिलसिला कायम, मिलें नजरें तो आँखो मे शरम रखना।। बनाकर दूरिया चलना मुहब्बत में, फसाने मे हकीकत…

  • बहुत कम दिन हुए यारों | Kam Din Hue

    बहुत कम दिन हुए यारों ( Bahut kam din hue yaron )    अभी उनको भुलाए दिन बहुत कम दिन हुए यारों मुहब्बत आजमाए दिन बहुत कम दिन हुए यारों। जरा सी है ख़लिश बाकी ज़रा बाकी निशां उनके उन्हें दिल से हटाए दिन बहुत कम दिन हुए यारों। परिंदा सीख लेगा जल्द ही उड़ना…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *