Ghazal Nigahen Mila Kar

निगाहें मिलाकर | Ghazal Nigahen Mila Kar

निगाहें मिलाकर

( Nigahen Mila Kar )

 

देखों ना सनम तुम यूँ नज़रे घुमाकर
करों ना सितम यूँ निगाहें मिलाकर !

करोगी कत्ल तुम कई आशिको का,
ये जलवें हसीं यार उनको दिखाकर !

घटाओं सी जुल्फ़े बनाती है कैदी,
करोगी हमें क्या कैदी तुम बनाकर !

ज़रा सा ये दिल है इसे बख़्श दो तुम,
अजी क्या मिलेगा कलेजा जलाकर !

अदाओं ने तेरी बहुत है सताया
ख़ुशी ना मिलेगी ‘धरम’ को सताकर !!

डी के निवातिया

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

दिल लगाते लगाते | Ghazal Dil Lagate Lagate

Similar Posts

  • हमदम मेरे | Humdum Shayari

    हमदम मेरे ( Humdum Mere ) हमदम मेरे कब आओगे या ऐसे ही तड़पाओगे वक़्त है अब भी आ जाओ तुम वक़्त गया तो पछताओगे उतना ही उलझेंगी काकुल जितना इनको सुलझाओगे आ भी जाओ बाहों में अब कब तक यूं ही तरसाओगे फोन पे ही फ़रमा दो दिलबर हम पे करम कब फ़रमाओगे खोल…

  • सुनाई देगी तुझे मेरी सिसकियाँ | Siskiyaan Shayari

    सुनाई देगी तुझे मेरी सिसकियाँ ( Sunai degi tujhe meri siskiyaan )    है प्यार देख लो दोनों के दर्मियाँ अब भी उसी के नाम पे रुकती हैं हिचकियाँ अब भी कभी छुपा के दी तुमने मुझे किताबों में रखी हैं मैंने वो महफ़ूज चिट्ठियाँ अब भी क़ुबूल होगी कभी तो दुआ ख़ुदा के दर…

  • ओ सितमगर तू भी | Ghazal O Sitamgar

    ओ सितमगर तू भी ( O Sitamgar tu Bhi ) शह्र वीरान भी दहशत की गवाही देंगे ढ़ेर बारूद के दुनिया को तबाही देंगे शब अमावस की न हम तुमको सियाही देंगे हम तुम्हें जाने अदा सिर्फ़ वफ़ा ही देंगे टूट जाये मेरा ये जाम भी परवाह नहीं मेरे हाथों में तो मयख़ार सुराही देंगे…

  • तमाम शख़्स | Tamam Shakhs

    तमाम शख़्स ( Tamam Shakhs ) तमाम शख़्स यूं तो जिंदगी में आए गएबस एक आप ही ऐसे हैं जो बुलाए गए हर उस कहानी को सुनने के तलब-गार हैं हमकि जिस कहानी में हम बेवफ़ा बताए गए के जब भी वसवसे आए हैं काटने को मुझेतुम्हारी याद के लुक़मे उन्हें खिलाए गए बहार आई…

  • रह गए हम | Rah Gaye Hum

    रह गए हम हम नज़र होते होते रह गए हमहमसफ़र होते होते रह गए हम शब में लगने लगा मुकम्मल हैऔर सहर होते होते रह गए हम हमने सोचा किसी के हो जाएँहाँ मगर होते होते रह गए हम बस कहानी थी यूँ तो कहने कोचश्मे-तर होते होते रह गए हम साथ हमने बाताए सात…

  • न करे कोई | Na Kare Koi

    न करे कोई  ( Na Kare Koi )   अम्ल ऐसा हो कि रुसवा न करे कोई! सरे – राह पत्थर रक्खा न करे कोई! कहां लेके ये जाएगी नाकामियां अपनी मुल्क में इमां का सौदा न करे कोई! मसल फूलों को डाला आवेश में उसने संगदिल को चुभा कांटा न करे कोई! दर्द इसलिए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *