शौक़ है
( Shauk Hai )
बज़्म-ए-सुख़न की शान बढ़ाने का शौक़ है।
हमको भी शेअ़र सुनने-सुनाने का शौक़ है।
तूफ़ान के ह़दफ़ पे तो रहना ही है उन्हें।
जिनको वफ़ा के दीप जलाने का शौक़ है।
कांटे किसी की राह में वो क्या बिछाएंगे।
पत्थर पे जिनको फूल चढ़ाने का शौक़ है।
हरगिज़ किसी के दर पे वो देते नहीं सदा।
दस्त-ए-हुनर से जिनको कमाने का शौक़ है।
करता है वो इ़लाज मरीज़ों का मुफ़्त में।
जिस आदमी को हंसने-हंसाने का शौक़ है।
कमज़र्फ़ी उनकी ले के उन्हें डूब जाएगी।
अह़सान करके जिनको जताने का शौक़ है।
वादा ख़िलाफ़ी आपका शेवा है कीजिए।
हमको तो वादा करके निभाने का शौक़ है।
लब्बैक उनकी बात पे क्या बोलना फ़राज़।
जिनको हवा में तीर चलाने का शौक़ है।

पीपलसानवी
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