बहुत बेचैन हूँ

बहुत बेचैन हूँ | Ghazal Bahut Bechain Hoon

बहुत बेचैन हूँ

( Bahut Bechain Hoon )

सुकूँ दिल में यहाँ रहता नहीं है?
ख़ुशी का जब यहाँ साया नहीं है

बहुत बेचैन हूँ उसके लिये मैं
अभी तक शहर से लौटा नहीं है

उसे मैं कह सकूं कुछ बात दिल की
मुझे वो राह में मिलता नहीं है

उसे गुल देखकर पचता रहा हूँ
कभी दिल से उसे परखा नहीं है

मिले अब दोस्त कोई चाहता हूँ
अकेले व़क्त अब कटता नहीं है

उसे दूँ फूल आज़म प्यार का जो
मुझे ऐसा मिला मौक़ा नहीं है

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

क्या लिखूं मैं | Ghazal Kya Likhun Main

Similar Posts

  • ज़ख्म यादों के | Zakhm Yaadon ke

    ज़ख्म यादों के ( Zakhm yaadon ke )    न जानें मुझसे वहीं दिल अजीब रखता है नहीं मुहब्बत नफ़रत वो क़रीब रखता है बुरा किया भी नहीं है कभी उसी का ही वहीं दिल को क्यों मुझी से रकीब रखता है किसे देखेगा मुहब्बत भरी नज़र से वो मुहब्बत से ही वहीं दिल ग़रीब…

  • पानी पानी हर तरफ़

    पानी पानी हर तरफ़ दिख रहा है आज हमको पानी पानी हर तरफ़कर रहा है ख़ूब बादल मेहरबानी हर तरफ़ बेतकल्लुफ़ होके दोनों मिल न पाये इसलिएबज़्म में बैठे थे मेरे खानदानी हर तरफ़ तोड़कर वो बंदिशें वादा निभाने आ गयाकर रहे थे लोग जब के पासबानी हर तरफ तेरे जैसा दूसरा पाया नहीं हमने…

  • घर की इज़्ज़त | Ghazal Ghar ki Izzat

    घर की इज़्ज़त ( Ghar ki Izzat )   यह हुनर दिल में ढाल कर रखना घर की इज़्ज़त सँभाल कर रखना हर तरफ़ हैं तमाशबीन यहाँ कोई परदा भी डाल कर रखना मैं भी दिल में तुम्हारे रहता हूँ अपने दिल को सँभाल कर रखना हर ग़ज़ल अंजुमन में छा जाये दर्द दिल का…

  • अरमान बाकी है | Armaan Baki Hai

    अरमान बाकी है ( Armaan Baki Hai )   इक अरसे जो तेरे बगैर चली वो साँस काफी है, बिछड़ कर भी तू मेरा रहा ये एहसास काफी है, सब पूछते हैं कैसे सफ़र किया तन्हा, मैंने कहा ज़िंदा रहने केलिए आख़िरी मुलाकात काफी है, तेरे ख़्याल से ही रौशन रहीं मेरी तन्हाईयाँ सदा, तुझे…

  • मगर दिल मे प्यार है | Magar Dil me Pyar Hai

    मगर दिल मे प्यार है ( Magar dil me pyar hai )         मेरी आखों मे है जलन, मगर दिल मे प्यार है। कलम उठाऊं या हथियार, दोनो मे धार है ।। कहते है कुछ और , करते है कुछ और सियासत बन गई देखो व्यापार है। कलम उठाऊं या हथियार, दोनो मे…

  • नाम लेकर मुझे तुम बुलाया करो

    नाम लेकर मुझे तुम बुलाया करो नाम लेकर मुझे तुम बुलाया करोजब भी जी चाहे तुम आज़माया करो बेगुनाहों की फ़रियाद सुनता है रबझूठी तुहमत न ऐसे लगाया करो इश्क़ का तुहफा भी नज़्र करती तुम्हेंमेरी ग़ज़लों में आकर समाया करो बात माना करो दूसरों की भी तुमहर समय अपनी ही मत चलाया करो ये…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *