gile shikwe ki reet

गिले-शिकवे की रीत

गिले-शिकवे की रीत

पहर-दर-पहर वो मुझे शिद्दत से याद आते रहे, वो क्या जाने ये

चांँद-सितारे किस कदर उनकी यादों के नश्तर मेरे सीने में चुभाते रहे,

बहुत चाहा था कि भूल जाएं उस बेवफ़ा को, मगर ख़्याल उनके दिल

से निकलते ही नहीं, बनाकर आशियाना इस कदर वो दिल में हलचल मचाते रहे,

शब-ए-हिज्रा में जब हम तकते हुए राह उनकी खुद‌ से ही खुद

मुलाकात करते रहे, वो बेवफ़ा गैरों की ख़्वाबगाह में इतराते रहे,

मिली थी जो तुमसे कभी इत्तेफ़ाक से मोहब्बत, समझ कर उसे

तेरी इनायत, हम हैं खुशनसीब ये अपने दिल को समझाते रहे,

लो अब तोड़ कर रिश्ता-ए-उम्मीद हम भी तुम्हारे ही रंग में रंग गए,

नहीं करते अब गिले-शिकवे किसी से,  खुद से ही गिले-शिकवे की रीत निभाते रहे,

प्रेम बजाज © ®
जगाधरी ( यमुनानगर )


पहर-दर-पहर – ( दिन रात)

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • नफ़रतों के ये नजारे नहीं अच्छे लगते

    नफ़रतों के ये नजारे नहीं अच्छे लगते नफ़रतों के ये नजारे नहीं अच्छे लगतेखून से लिपटे हमारे नहीं अच्छे लगते कद्र -जो मात- पिता की न किया करते हैंअपने ऐसे भी दुलारे नहीं अच्छे लगते जान लेती हैं हमारी ये अदाएँ तेरीयूँ सर -ए बज़्म इशारे नहीं अच्छे लगते जिनमें ज़हरीले से दाँतों की रिहाइश…

  • बहकी-बहकी सी | Ghazal Behki Behki Si

    बहकी-बहकी सी ( Behki Behki Si ) बहकी-बहकी सी वो रहती तो है कब से, मन ही मन में कुछ वो कहती तो है कब से ! चल रहा है क्या ना जाने दिल में उसके, बन शिला सी सब वो सहती तो है कब से ! राज कुछ तो है छुपा दिल में दबाये,…

  • हमारा वतन | Ghazal Hamara Watan

    हमारा वतन ( Hamara Watan ) बहुत खूबसूरत हमारा वतन हमें जान से भी है प्यारा वतन हमें याद रखनी शहादत सभी लहू दे के सबने सँवारा वतन नज़र कोई बद डाल सकता नहीं है आँखों का सबकी ये तारा वतन सभी मज़हबों को यहाँ चैन है जगत भर में है अपना न्यारा वतन है…

  • ग़म-ए-इ़श्क़ | Gham-e-Ishq

    ग़म-ए-इ़श्क़ ( Gham-e-Ishq ) पहले पत्थर सा कलेजे को बनाया होगा।तब कहीं उसने ग़म-ए-इ़श्क़ छुपाया होगा। ख़ूब कोहराम हर इक सम्त मचाया होगा।जब ह़सीं रुख़ से नक़ाब उसने हटाया होगा। याद जब मेरी उसे भूल से आयी होगी।आबे-चश्म-उसने बहुत देर बहाया होगा। सांस तारों की भी थम सी गई होगी वल्लाह।चांदनी शब में वो जिस…

  • देखना है | Dekhna Hai

    देखना है ज़ब्त अपना आजमाकर देखना है,उसे सितमगर को भुला कर देखना है। ज़र्फ़ की उसके मिसालें लोग देते,बस जरा गुस्सा दिला कर देखना है। चंद सिक्कों में सुना बिकती मोहब्बतपर कहाॅं बाजार जाकर देखना है। वह ख़ुदा रहता हमारे ही दिलों मेंबुग़्ज़ की ऐनक हटाकर देखना है। इश्क़-ए-दुश्वारी में लज्ज़त है अगर तो,फिर हमें…

  • नहीं हूँ मैं | Nahi Hoon Main

    नहीं हूँ मैं ( Nahi Hoon Main ) पुख़राज़ कोहिनूर या गौहर नहीं हूँ मैंलूटे जो बज़्म तेरी वो शायर नहीं हूँ मैं बूढ़ा हूँ उम्र से हुआ जर्जर नहीं हूँ मैंदीवार-ओ- दर है साथ में खंडर नहीं हूँ मै कमतर नहीं अगर सुनो बदतर नहीं हूँ मैंलेकिन किसी अमीर का चाकर नहीं हूँ मैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *