इस तरह याद आया न कर

इस तरह याद आया न कर

तू मुझे इस तरह याद आया न कर
मेरी ही धुन में तू वक़्त ज़ाया न कर

तेरी महफ़िल में चल के अगर आ गया
तो नज़र मुझसे दिलबर चुराया न कर

गुल में भी तू नज़र आए जान-ए- ग़ज़ल
हर किसी के दिलों को यूँ भाया न कर

काफ़िया हूँ मैं तेरा तू मेरा रदीफ़
देखकर इसलिए तू लजाया न कर

कल की मालूम मुझको नहीं ज़िन्दगी
आज का वक़्त है इसको ज़ाया न कर

पैसों को देखकर इश्क़ होता है अब
ऐसे आशिक़ से रिश्ता बनाया न कर

सिलसिला गुफ़्तगू का बढ़ा है ‘सुमन’
है अगर इश्क़ दिल में छिपाया न कर

सुमंगला सुमन

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • मैं दिल से ख़ूबसूरत हूँ | Khoobsurat Shayari

    मैं दिल से ख़ूबसूरत हूँ ( Main dil se khoobsurat hoon )   मैं अपने आप में जो आज इक ज़मानत हूँ किसी की नेक इनायत की ही बदौलत हूँ जो मुझको छोड़ गया था मेरे भरोसे पर मैं आज तक ही उसी शख़्स की अमानत हूँ ज़माना शौक से पढ़ने लगा है यूँ मुझको…

  • जाने क्यों इतराते हैं लोग…?

    जाने क्यों इतराते हैं लोग…? खुद को समझदार समझकर जाने क्यों इतराते हैं लोग,प्रश्नों के जाल में आकर खुद ब खुद फँस जाते हैं लोग। सच की परछाई से डरकर नज़रें क्यों चुराते हैं लोग,झूठ के सहारे दुनिया में मेले क्यों सजाते हैं लोग। रिश्तों की सौदागरी में दिल का वज़न भुला बैठे,फ़ायदे की ख़ातिर…

  • मुक़द्दर से सामना है मेरा | Muqaddar se Samna hai Mera

    मुक़द्दर से सामना है मेरा ( Muqaddar se Samna hai Mera ) बड़े अजीब से मंज़र से सामना है मेरा बग़ैर कश्ती समुंदर से सामना है मेरा जहाँ जलाई गईं हसरतें मेरे दिल की उसी चराग़ उसी दर से सामना है मेरा अजीब दिल की ये हालत है क्या बताऊं तुम्हें किसी हसीन के पत्थर…

  • दीप जलते ही | Deep Jalate Hi

    दीप जलते ही ( Deep Jalate Hi ) छुप के बैठी थी कहीं शातिर हवा।दीप जलते ही, हुई हाज़िर हवा। तर्के-मय वाले परेशानी में हैं,बू-ए-मय अब मत उड़ा काफ़िर हवा। यक-ब-यक गुमसुम नदी क्यों हँस पड़ी,मौज से क्या कह गई आख़िर, हवा। क्या ठिकाना कब, कहाँ को चल पड़े,रुख़ बदलने में तो है माहिर हवा।…

  • देख तो सही | Dekh to Sahi

    देख तो सही ( Dekh to Sahi ) कोई भी रह न जाए कसर देख तो सहीचल छोड़ बात चीत मगर देख तो सही रख कर मुझे वो ढूँढ रहा है यहाँ वहाँचिल्ला रहा हूँ कब से इधर देख तो सही नाज़ुक सी शै पे बार-ए-क़यामत है किसलिएयारब तरस खा सू-ए-कमर देख तो सही हैरत-ज़दा…

  • सादगी | Ghazal Saadgi

    सादगी ( Saadgi )   अब नुमाइश की हुकूमत और हारी सादगी हम को तो हर तौर ले डूबी हमारी सादगी। रंग से खुशबू धनक से फूल जुगनू चांद से दो जहां से ख़ूबसूरत है तुम्हारी सादगी। शख़्स था सादा बहुत वो क्या मगर उसको हुआ जाने उसने छोड़ दी क्यों अपनी सारी सादगी। बज़्म…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *