Haar Kabhi na Swikar Kar

पर हार कभी न स्वीकार कर | Haar Kabhi na Swikar Kar

पर हार कभी न स्वीकार कर

( Par haar kabhi na swikar kar )

 

दर्श पथ कंटक बाधा ,
किंचित नहीं घबराना ।
थोड़ा चिंतन मनन कर,
मूल कारण पत्ता लगाना ।
फिर लगा कर दुगुनी ताकत,
अदम्य सी एक उड़ान भर ।
पर हार कभी न स्वीकार कर… ।।

बुलंद हौसलों संग होती,
हर मंजिल आसान ।
संघर्ष सीमा उस पार ,
मिलता सुंदर सा जहान ।
श्रम निष्ठ तपिश सह,
हो जा पसीने संग तर ।
पर हार कभी न स्वीकार कर…।।

आत्मविश्वास मैत्री पर,
जो आगे नित्य बढ़ता ।
नव्य भव्य शिखरों पर,
कीर्तिमान वो ही गढ़ता ।
प्रसून चाह राह पर,
कभी न रख कांटों का डर ।
पर हार कभी न स्वीकार कर…।।

कभी दिग्भ्रमित होने पर,
अभिप्रेरणा अंतर मित्र ।
अर्जुन सी निगाहें रख,
उरस्थ भाव सारे पवित्र ।
फिर वरण कर सफलता ,
देख सतत कर्म साधना असर ।
पर हार कभी न स्वीकार कर…।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

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