हमने अब स़ख़्त जान कर ली है

हमने अब स़ख़्त जान कर ली है

हमने अब स़ख़्त जान कर ली है

हमने अब स़ख़्त जान कर ली है
दूरी अब दरमियान कर ली है

मिट गयी आन बान है सारी
ख़तरे में और जान कर ली है

करने दीदार हमने हूरों का
आस्माँ पे दुकान कर ली है

इस परिंदे ने माँ से मिलने को
आज लंबी उड़ान कर ली है

रोज़ कह -कह के यूँ ग़ज़ल ऐसे
कैसी हमदम थकान कर ली है

उम्र सोलह को पार करके अब
ज़िंदगी ये जवान कर ली है

उम्र जब से ढ़लान पर आयी
बंद अपपनी ज़ुबान कर ली है

क़ाफ़िया थे ग़ज़ल के कम लेकिन
कहने में खींचतान कर ली है

पढते गीता कुरान हम मीना
याद सारी अज़ान कर ली है

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • तुम जो ज़ाहिर अगर ज़रा होते

    तुम जो ज़ाहिर अगर ज़रा होते तुम जो ज़ाहिर अगर ज़रा होतेआने वालों का रास्ता होते ग़र दुबारा ये राब्ता होताकुछ न होते तो हमनवा होते ख़ुद को कितना निहारते हैं वोकाश हम यार आइना होते आप हम हैं तभी न सब कुछ हैहम न होते तो क्या ख़ुदा होते रोते रोते यही कहा उसनेख़ैर…

  • मर जायेगा | Ghazal Mar Jayega

    मर जायेगा ( Mar Jayega )   तू जो छोड़ेगा तो बेमौत ही मर जायेगा शाख से टूट के पत्ता ये किधर जायेगा। उसके वादे का क्या है वो तो करेगा लेकिन ऐन वो वक्त पे वादे से मुकर जायेगा। इन दिनों ही है खुली उसकी हकीक़त मुझ पे लग रहा अब वो मेरे दिल…

  • जुगनू दुबक रहे होंगे

    जुगनू दुबक रहे होंगे ये सर्द रात है जुगनू दुबक रहे होंगेहज़ारों दिल के दरीचे खटक रहे होंगे मुझे यक़ीन है महफ़िल में उनके आते हीहरिक निगाह में वो ही चमक रहे होंगे मैं सोचता हूँ हटा दूँ हया के पर्दों कोवो मारे शर्म के शायद झिझक रहे होंगे नज़र के तीर से जो ज़ख़्म…

  • हवा रुक जायेगी

    हवा रुक जायेगी गर ख़ुदा रहमत करे तो हर बला रुक जायेगीजल उठेंगे बुझते दीपक यह हवा रुक जायेगी इसलिए हाकिम के आगे रख दिये सारे सबूतजुर्म साबित हो न पाये तो सज़ा रुक जायेगी साथ तेरे हैं अगर माँ की दुआएं ख़ौफ़ क्यातेज़ तूफाँ में भी कश्ती नाख़ुदा रुक जायेगी बेवफ़ाई से तेरी परदे…

  • कितना है प्यार | Kitna Hai Pyar

    कितना है प्यार ( Kitana Hai Pyar ) कितना है प्यार याद दिलाने की देर हैयानी कि दूर यार से जाने की देर है इक राज़ को तमाशा बनाने में कितनी देरअपने से दूसरे को बताने की देर है इतना तुनक-मिज़ाज हूँ कमरा भी हर तरफ़बिखरा हुआ मिलेगा सजाने की देर है अर्ज़ो-समा का हो…

  • घर की अदला-बदली करके सियासत करने वालों से

    घर की अदला-बदली करके सियासत करने वालों से जनता ही लेगी हिसाब, बग़ावत करने वालों से,घर की अदला-बदली करके सियासत करने वालों से। टूटी फूटी, नाली सड़कें, गुस्से में है बच्चा बच्चा,एक महफ़िल ही नाराज़ नहीं, सदारत करने वालों से। कल तक जिनको गाली दी थी कैसे आंख मिलाओगे,पूछ रहा हूं, मैं भी आज, हिमायत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *