हमसे अब नाराज़गी अच्छी नहीं

हमसे अब नाराज़गी अच्छी नहीं

हमसे अब नाराज़गी अच्छी नहीं

आँखों में इतनी नमी अच्छी नहीं
हमसे अब नाराज़गी अच्छी नहीं

बज़्म में बैठे वो नज़रें फेर कर
इश्क़ में  ये बेरुख़ी अच्छी नहीं

हौसला ता-ज़िंदगी रखना बुलंद
इस क़दर आज़ुर्दगी अच्छी नहीं

वो सराबों में ग़ज़ालों की तरह
इश्क़ की  सर गश्तगी अच्छी नहीं

पास रखिए अपनी उल्फ़त का ज़रा
प्यार में आवारगी अच्छी नहीं।

हर तरफ तुमको ही देखे ये नज़र
बज़्म में तेरी कमी अच्छी नहीं

मीर ग़ालिब सा सुख़न दरकार है
आज मीना शायरी अच्छी नहीं

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • चाहता हूँ | Chahta Hoon

    चाहता हूँ ( Chahta Hoon ) माँग तेरी मैं सज़ाना चाहता हूँहाँ तुझे अपना बनाना चाहता हूँ राह उल्फ़त की बनाना चाहता हूँप्यार हर दिल में बसाना चाहता हूँ आप बिन तो इस जहाँ में कुछ नही हैबात मिलकर ये बताना चाहता हूँ दो कदम जो साथ मेरे तुम चलो तोइक़ नई दुनिया दिखाना चाहता…

  • तेरे सिवा | Tere Siva

    तेरे सिवा ( Tere Siva )   अभी तक फ़ूल वो फेंका नहीं हमने कोई तेरे सिवा देखा नहीं हमने किया है याद तुझको हर घड़ी दिल में कि कोई और सोचा नहीं हमने गयी क्यूँ छोड़कर तू फ़िर यहाँ तन्हा किया वादा ख़िलाफ़ तेरा नहीं हमने बता हमसे ख़फ़ा है क्यों भला फ़िर यूं…

  • हवाओं में आ गए | Poem Hawaon Mein aa Gaye

    हवाओं में आ गए ( Hawaon mein aa gaye )   शोहरत मिली तो आज हवाओं में आ गए रिश्ते भुला के ख़ास ख़लाओं में आ गए। हमको नहीं मालूम हुआ कब ये वाकया कब ख़्वाब से सरकार दुआओं में आ गए। फ़िरऔन मेरा इश्क़ बनाने लगा उन्हें बुत के सनम वो आज़ ख़ुदाओं में…

  • हमने देखी है | Hamne Dekhi Hai

    हमने देखी है ( Hamne Dekhi Hai ) वह्म जैसी कोई बला ही नहीं।इस मरज़़ की कहीं दवा ही नहीं। हमने देखी है हम बताएंगे।हिज्र जैसी कोई सज़ा ही नहीं। लाख कोशां रहे अ़दू लेकिन।क़द हमारा कभी घटा ही नहीं। ज़ुल्म ढाता है रात दिन फिर भी।उसकी नज़रों में ये ख़ता ही नहीं। अ़हदे ह़ाज़िर…

  • क्या करें बहार का | Kya Kare Bahar ka

    क्या करें बहार का ( Kya kare bahar ka )    मस अले हज़ार हो तो क्या करें बहार का अभी उलझ रहा है कुछ हिसाब कारोबार का। याद आ रहा वही बहार में न जाने क्यूं पास है जिसे न कौल का न ही करार का। मजलिसों में देखकर नज़र चुरा रहा है वो…

  • रत-जगे | Rat-Jage

    रत-जगे ( Rat-Jage ) ख़ल्वत में रत-जगे,कभी जलवत में रत-जगे।बरसों किए हैं हमने मुह़ब्बत में रत-जगे। करते हैं जो ख़ुदा की इ़बादत में रत-जगे।आएंगे काम उनके क़यामत में रत-जगे। समझेगा कैसे हाय वो लुत्फ़-ए-ग़म-ए-ह़यात।जिसने किए हैं सिर्फ़ मुसर्रत में रत-जगे। क़ुरबत में चैन देते हैं यह बात सच है,पर।तकलीफ़ दिल को देते हैं फ़ुरक़त में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *