हनुमान जन्मोत्सव

हनुमान जयन्ती

हनुमान जयन्ती


शांति,गीत,श्रद्धा,समर्पण
आदि गरिमामय जीवन
और व्यक्तित्व से
धर्म का सुंदर समन्वय
ज्ञान सागर लहराने वाले
आनंद के लोक में ले जाने वाले
क़लम के कृति रत्न समुद्दभूत
हनुमान जी को मेरा भावों
से वंदन -अभिनंदन !
शत- शत नमन ! प्रणाम !
जो ज्ञाता है वह
स्वयं अज्ञात है ।
अज्ञात को ज्ञात करने
का प्रयत्न होना चाहिए
विभिन्न माध्यमों के द्वारा
क्योंकि आत्मा को भी अपना
सही से स्थायी घर चाहिए
वह उसको जब तक
घर नहीं मिलता है तो
वह संसार भ्रमण में
भटकती रहती है
आत्मा का घर मोक्ष है
यह आत्मानंद का स्थान
कितना आकर्षक है
वह यहाँ तक उसके
पहुँचने की यात्रा
कितनी कठिन है
हम सदैव हनुमान जी की
तरह आगे से आगे सही
से प्रयासरत रह इस
दिशा में गतिमान रहकर
सहज आनन्द की अनुभूति
का क्षण प्राप्त करे
वह आत्मा के
“प्रदीप “ को पायें
यही हमारे लिए
काम्य है ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

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