Hindi bal kavita

हिन्दी की बात | Hindi ki Baat

हिन्दी की बात

( Hindi ki Baat )

कहने को
हम हिन्दी को बहुत मानते हैं
और बच्चों का प्रवेश
अंग्रेजी माध्यम में करवाते हैं।
ओ! दोहरी मानसिकता के लोग,
मातृभाषा से दूर रहकर
बच्चे का विकास होगा क्या?
मातृभाषा तो सहज ही
हर शिशु सीख लेता है,
तो हम उस बस्ते के बोझ के साथ
क्यों अंग्रेजी का बोझ डालें?
हिन्दी को जीवन का
क्यों ना आधार बना लें?

थैंक्यू की बजाए
कोई धन्यवाद कह दे
तो उसपर तुम्हें
हँसी आती है,
आदत नहीं है ना
तुम्हें सुनने की।

बस हिन्दी दिवस पर ही
हिन्दी के हम अग्रदूत बन जाते हैं
और साल भर उससे
पल्ला झाड़ते हैं।

कीर्ति जायसवाल ‘कृतिका’
प्रयागराज

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • कोणार्क सूर्य मंदिर | Kavita Konark Mandir

    कोणार्क सूर्य मंदिर ( Konark Surya Mandir )    वास्तुकला व डिजाइन का वो है ऐसा उदाहरण, समय की गति को दर्शाता सुंदर वहां पर्यावरण। काला पगोड़ा भी कहते इसे गहरे रंग के कारण, एस्ट्रोनोमी, आर्किटेक्चर का अद्भुत उदाहरण।। सूर्य देव की प्रथम किरण आती है इस मंदिर में, ७७२ वर्ष पुराना मंदिर है जो…

  • बचपना | बालगीत

    बचपना  ( Bachpana ) पुआल पर दौड़कर जीत जाते हैं, बारिश में भीगकर नाव चलाते हैं। बर्तनों से खेलकर खाना बनाते हैं-, चुपके से चलके याद, बचपन में चले जाते हैं । मुकुट मोर पंखों का लगाकर, कृष्ण बन जाते हैं, नीले आकाश को छूकर धरती पर इतराते हैं। कपड़ा ओढ़ मेढ़क बनकर, बारिश करवाते…

  • चॉकलेट डे

    चॉकलेट डे तेरी यादों की मिठास से, हर लम्हा गुलजार है, तेरे बिना भी ये दिल तुझसे ही सरोकार है।हर एहसास, हर ख्वाब बस तुझसे है जुड़ा,जैसे चॉकलेट की खुशबू में लिपटा दिकुप्रेम का प्यार है। आज चॉकलेट डे पर तेरा एहसास पास लगे,तेरी मुस्कान ही मेरे प्यार की मिठास लगे।हर लफ़्ज़, हर धड़कन बस…

  • हरा रंग | Hara Rang par Kavita

    हरा रंग ( Hara rang )    हरा रंग हरियाली का सद्भाव प्रेम खुशहाली का उत्साह पत्ता डाली का सुरभीत चमन माली का धरा मुस्कुराने लगी फिर ओढ़कर धानी चुनरिया कुदरत लहराने लगी ज्यों झूमी ब्रज में गुजरिया हरी भरी ये वसुंधरा हमारी लगती सबको प्यारी है रंग बिरंगे फूलों की महकती केसर की सी…

  • नया भारत | Kavita Naya Bharat

    नया भारत ( Naya Bharat ) पतझड़ का पदार्पण हुआ है हर ओर एक दुःख छाया है उजड़ गया जो उपवन उसे फिर बारिश से हमें खिलाना है अमावस की स्याह रात है एक-दूसरे के हम साथ है अंधियारा मिटाने के लिये मिलकर दीप जलाना है मझधार में फंसी है नाव हमारी फिर भी हिम्मत…

  • पापा पढ़ने जाऊंगी | Bal diwas poem in Hindi

    पापा पढ़ने जाऊंगी  ( Papa padhne jaungi )   गांव में खुलल आंगनबाड़ी मैं पापा  पढ़ने जाऊंगी तुम पढ़ें नही तो क्या हुआ? मैं पढ़कर तुम्हें पढ़ाऊंगी,   सीख हिन्द की हिंदी भाषा हिन्दुस्तानी कहलाऊंगी अरूणिमा सी बन कर बेटी पापा की नाम बढ़ाऊंगी ,   बेटा से बढ़कर बेटी है यह सिद्ध कर दिखलाऊंगी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *