Hindi Poem on Zindagi

जिंदगी जब हम जीने लगे | Hindi Poem on Zindagi

जिंदगी जब हम जीने लगे

( Zindagi jab hum jeene lage ) 

 

जिंदगी जब हम जीने लगे
गम के घूंट थोड़े पीने लगे
अश्रु टपके नयन से हमारे
अपनो को वो पसीने लगे

जिंदगी जब हम जीने लगे
लबों को धीरे से सीने लगे
बातों में वजन कितना है
साबित होने में महीने लगे

जिंदगी जब हम जीने लगे
बहारों के मौसम झीने लगे
शब्दों के मोती बरसे नजर
कसीदे भी ताजा तरीने लगे

जिंदगी जब हम जीने लगे
घाट घाट का नीर पीने लगे
जीने का सलीका पाया है
लफ्ज़ मीठे भाव भीने लगे

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

मां | Maa ke Upar Poem

 

Similar Posts

  • रिश्तो का मेला | Poem on rishtey in Hindi

    रिश्तो का मेला ( Rishton ka mela )     सद्भाव का संगम अनूठा  रिश्तो का मेला जहां उमड़ता सागर है अपनापन अलबेला   एक दूजे के दर्द बांटते सुखों में रहते शामिल तीज त्योहार होली दिवाली सब मनाते हिलमिल   खुशियों का संसार हमारा प्यारा रिश्तो का मेला धागा है यह अटूट प्रेम का…

  • छांव की तलाश | Chhand chhav ki talaash

    छांव की तलाश ( Chhav ki talaash )   चिलचिलाती धूप में, पंछी पानी को तरसे। गर्मी से व्याकुल फिरे, छांव की तलाश में।   सूख गये नदी नाले, छाया सब ढूंढ रहे। गर्म तवे सी धरती, तप रही आग में।   झुलस रहे हैं सारे, जलती हुई धूप में। ठंडी छांव मिले कहीं, चल…

  • प्रणय उत्संग | Pranay Utsang

    प्रणय उत्संग ( Pranay Utsang )   प्रणय उत्संग,उत्सविक हावभाव जीवन पथ अभिलाष प्रभा, आनंदिका स्पर्श अनुभूति । पर वश श्रृंगार विहार, चाल ढाल सम अरुंधति । मधुर मृदुल स्वर लहरियां, उष्ण विराम शीतल छांव । प्रणय उत्संग,उत्सविक हावभाव ।। आचार विचार व्यवहारिकी, स्व पालन नैतिक संहिता । अवांछित संकीर्णता पटाक्षेप, सकारात्मक सोच अंकिता ।…

  • याद तेरी जब आती है | Poem yaad

    याद तेरी जब आती है ( Yaad teri jab aati hai )   मन  के  जुड़ते  तार  सभी, दूरियां मिट जाती है। मधुर मधुर दुनिया लगती, याद तेरी जब आती है।   खुल जाता किस्मत ताला, सारी बातें उर भाती है। स्वर संगीत सुहाता लगता, याद तेरी जब आती है।   मधुर बरसता सावन लगता,…

  • वैशाखी | Baisakhi par Kavita

    वैशाखी ( Baisakhi )    लहलहाती फसल खेत में खुशियों की घड़ी आती है झूम उठते सब मस्ती में फसलें कटने को आती है गंगा धारा बह अवनी पे अवतरित हो जब आई वैशाखी का पावन दिवस हर्ष उमंग घट घट छाई खास खालसा सिक्खों का भावन नृत्य भांगड़ा भाई हलवा पूरी खीर जिमाए संग…

  • पगड़ी | Pagadi par Kavita

    पगड़ी ( Pagadi )    ये है कपड़े की एक छोटी सी पगड़ी, हरियाणा राजस्थान का मान पगड़ी। आन बान और शान भी यही पगड़ी, इज्जत और ईमान यह प्यारी पगड़ी।। बुजूर्गों की यही पहचान है ये पगड़ी, परिवार की यह एक लाज ये पगड़ी। दादा व नाना काका बाबा एवं मामा, पहनते है इसको…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *