Kisi ke Ishq Mein

किसी के इ़श्क़ में | Kisi ke Ishq Mein

किसी के इ़श्क़ में

( Kisi ke Ishq Mein )

बेफ़ैज़ ज़िन्दगानी का अफ़साना बन गया।
दिल क्या किसी के इ़श्क़ में दीवाना बन गया।

फूलों के मिस्ल खिल गया हर ज़ख़्म का निशां।
जो ज़ख़्म उसने दे दिया नज़राना बन गया।

वो थे क़रीबे क़ल्ब तो ह़ासिल थे लुत्फ़ सब।
जाते ही उनके घर मिरा ग़म ख़ाना बन गया।

वो क्या गए के ख़ाक तमन्नाएं हो गयीं।
गुलज़ारे इ़श्क़ आन में वीराना बन गया।

सादा सा एक दिल था मिरे पास वो भी अब।
जल कर किसी के इ़श्क़ में परवाना बन गया।

ऐसा भी दौर गुज़रा है अपना जनाबे मन।
बैठे जहां पे हम वहीं मयख़ाना बन गया।

करने लगा है बातें ये दानिशवरों की सी।
लगता है अब फ़राज़ भी फ़रज़ाना बन गया।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • ज़िन्दगी की बेवफाई | Zindagi ki Bewafai

    ज़िन्दगी की बेवफाई ( Zindagi ki Bewafai )    कहां हर वक्त काबू में यहां हालात होते हैं बड़ी मुश्किल में यारों बारहा दिन रात होते हैं। कभी जो पास थे दिल के वो लगते अजनबी से हैं वही रिश्ते मगर क्यों मुख़्तलिफ़ जज़्बात होते हैं। भुला देता है दिल रंगीनियां रोटी की उलझन में…

  • क्या हुआ कैसे हुआ कितना हुआ

    क्या हुआ कैसे हुआ क्या हुआ कैसे हुआ कितना हुआजो हुआ वो था नहीं सोचा हुआ फिर से रस्ते पर निकल आए हैं लोगफिर से देखा वो ही सब देखा हूआ दर्द तन्हाई अंधेरा सब तो हैंमैं अकेला तो नहीं बैठा हुआ उड़ गयी उल्फ़त किसी दीवार सेधूप में धुंधला गया लिख्खा हुआ इक रियासत…

  • बेहुनर से लोग | Behunar se Log

    बेहुनर से लोग ( Behunar se log )    कितने अजीब आज के दस्तूर हो गये कुछ बेहुनर से लोग भी मशहूर हो गये जो फूल हमने सूँघ के फेंके ज़मीन पर कुछ लोग उनको बीन के मग़रूर हो गये हमने ख़ुशी से जाम उठाया नहीं मगर उसने नज़र मिलाई तो मजबूर हो गये उस…

  • इस इश्क़ का | Iss Ishq Ka

    इस इश्क़ का ( Iss Ishq Ka ) इस इश्क़ का कोई भी फ़साना तो है नहींऔर गर हो कोई हमको सुनाना तो है नहीं पैग़ाम मिलता ही नहीं हमको ख़ुशी का यूँऔर ग़म मिले हैं कितने गिनाना तो है नहीं इस ज़िंदगी ने साथ हमारा नहीं दियाहम मुफ़लिसों का कोई ठिकाना तो है नहीं…

  • अपनी हस्ती ही मिटा दी हमने | Apni Hasti

    अपनी हस्ती ही मिटा दी हमने अपनी हस्ती ही मिटा दी हमनेअपने दुश्मन को दुआ दी हमने क्या सज़ा मुझको खुदा कल देगाआज जो ज़ीस्त सजा ली हमने। अपने यारो पे भरोसा करकेअपनी दुनिया ही मिटा दी हमने कोई वादा नही था मिलने काआँख राहों में बिछा दी हमने हाथ अपने ही उठाकर रब सेतेरी…

  • कोई अपना तो जग में हुआ ही नहीं

    कोई अपना तो जग में हुआ ही नहीं कोई अपना तो जग में हुआ ही नहींप्यार क्या है मुझे यह पता ही नहीं आज वो भी सज़ा दे रहें हैं मुझेजिन से अपना कोई वास्ता ही नहीं मैं करूँ भी गिला तो करूँ किसलिएकोई अपना मुझे तो मिला ही नहीं जिनसे करनी थी कल हमको…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *