Hum Do

हम दो | Hum Do

हम दो

( Hum do ) 

जहांँ हम दो हैं
वहीं है परिवार
सारा साज- श्रृंँगार
सुरक्षा और संस्कार।

जब साथ होते हैं
सुकून में भीगे-भीगे
लम्हात होते हैं
नेह का मेह बरसता है
खुद पर विश्वास
आशाओं का
आकाश होता है।

दौड़ती -भागती जिंदगी में
ये अल्पविराम अभिराम होता है
इन पलों में जैसे यहांँ
सदियों का आराम होता है।

@अनुपमा अनुश्री

( साहित्यकार, कवयित्री, रेडियो-टीवी एंकर, समाजसेवी )

भोपाल, मध्य प्रदेश

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