इन्दु सिन्हा “इन्दु” की कविताएँ | Indu Sinha Poetry
प्रेम – दो चित्र
(1)
“प्रेम एक याद”
प्रेम क्या है ?
क्या सिर्फ एक दैहिक रिश्ता ?
एक छत के नीचे रहना दो अजनबियों के समान ?
खोखली जंजीरों में जकड़े रिश्ते,
हर पल फिसलते,
मुट्ठी में दबी रेत के समान |
नहीं नहीं यह तो प्रेम नहीं है ,
प्रेम तो एक याद है,
वो याद जो दिलों में जिंदा है,
वहाँ जहाँ कॉफी हाउस के हल्के अँधियारे में,
हम दोनों के बीच उठ रहा कॉफी का धुँआ,
छू रहा था चेहरों को,
खामोशी की चादर पसरी थी,
आओ फिर तलाशें प्रेम को,
जाते है उस नदी की तरफ ,
बैठते हैं उस बेंच पर,
सुनते हैं नदी की लहरों का शोर,
लेते हैं स्वाद नमकीन मूँगफली का,
तुम दोगे मुझे लाल सुर्ख गुलाब,
मैं सहेज कर रखूँगी किताबों के भीतर,
बालों में नहीं लगाऊंगी गुलाब,
क्योंकि खुशबू कैद करना चाहती हूँ किताबों में,
यादें फिर करवटें लेती है,
मदहोशी से आँखे बंद होने लगती है |
(2)
इश्क के पौधे (कविता)
सफेद कैनवस सा ,
मेरा यह मासूम दिल
जब तुमने अपने अधरों से
छू लिया था मुझे,
सतरंगी तस्वीर बनने लगी
तुम्हारे प्यार की,
उगने लगे इश्क के नन्हे पौधे|
जिनमें भर उठे
रंग नीले,गुलाबी,हरे
रंगों से भरी मेरी भावनाओं में,
जब हम खोने लगे,
तो धरती मुस्कुरा उठी,
ढक लिया था,आसमान ने,
गाने लगे थे परिंदे,
गुलाबी हो उठी थी हवा,
आओ हम इसे कैद कर ले,
किसी परफ्यूम की नाजुक बोतल में,
जिससे बनी रहे
जीवन भर,
प्रेम की खुशबू और मिठास|

इन्दु सिन्हा ”इन्दु”
रतलाम (मध्यप्रदेश)







