राखी भी धन्य हो रही | Rakhi Poem in Hindi

राखी भी धन्य हो रही

( Rakhi bhai dhanya ho rahi )

 

राखी भी धन्य हो रही, सज शहीद मूर्ति की कलाई पर

रक्षा बंधन अद्भुत अनुपम,
अनंत भाई बहन स्नेह ।
असीम मंगल उर भावनाएं,
अथाह आनंद खुशियां मेह।
शहादत वंदन अभिनंदन शीर्ष ,
रक्षा सूत्र बांधती बहन रुलाई पर ।
राखी भी धन्य हो रही, सज शहीद मूर्ति कलाई पर ।।

सज धज सज संवर,
धर कर मंगल थाल ।
पदार्पण शहीद स्थल,
निहार एकटक भ्राता भाल ।
तिलक कर सिहर उठी ,
कंपन देह मां जाई पर ।
राखी भी धन्य हो रही,सज शहीद मूर्ति की कलाई पर ।।

याद आया वो बचपन,
जो आज इतिहास बना ।
शब्द सारे मौन हुए,
वर्तमान खामोश बना ।
भाव अर्थ अश्रु बने,
अलौकिक रस्म निभाई पर ।
राखी भी धन्य हो रही, सज शहीद मूर्ति की कलाई पर ।।

फिर भान कर देश भक्ति का,
हृदय तिरंगी उजास हुआ ।
सदा अजर अमर है भाई,
पुनीत हिय आभास हुआ ।
सुसंस्कार निर्वहन अति शोभित,
हिंद उत्सर्गी ललाई पर ।
राखी भी धन्य हो रही, सज शहीद मूर्ति की कलाई पर ।।

 

महेन्द्र कुमार

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