जीवन में ऐसा लम्हा है
जीवन में ऐसा लम्हा है

जीवन में ऐसा लम्हा है

( Jeevan Mein Aisa Lamha Hai )

 

 

जीवन में ऐसा लम्हा है

रोज ग़मों का ही साया है

 

उल्फ़त में टूटा दिल जब से

चैन नहीं दिल को आता है

 

वादा था आने का उसका

न कभी फ़िर वो ही आया है

 

वो पास नहीं लेकिन उसकी

यादों का छाया पहरा है

 

कैसे दोस्त मिलाऊँ आंखें

आंखों में उसकी धोखा है

 

नफ़रत की वो करता बातें

न मुहब्बत से वो बोला है

 

झूठा निकला है उल्फ़त में

न वही आज़म अब मिलता है

❣️

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

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