संस्कारों का गुलाब

Hindi Kavita | Hindi Poetry On Life | संस्कारों का गुलाब

संस्कारों का गुलाब

( Sanskaron Ka Gulab ) 

 

माता पिता के संस्कारों का गुलाब हूं,
हर किसी गालों का गुलाब थोड़ी हूं।

 

 

हर   फूलों   का   जो   रस   चखे
मैं   ऐसा   भंवरा   थोड़ी  हूं।

 

 

हर दिलों से शतरंज का खेल खेलू
ऐसा  दिलों  का  दलाल थोड़ी हूं।

 

 

स्वार्थ में जिस्म का पर्दा जो बेचें
उन  पर्दों  का  तलबदार थोड़ी हूं।

 

 

मिरी  दिलों  में  सीता,  मरियम है
मै राधिका मां, हनीप्रीत का थोड़ी हूं।

 

 

?

Dheerendra

लेखक– धीरेंद्र सिंह नागा

(ग्राम -जवई,  पोस्ट-तिल्हापुर, जिला- कौशांबी )

उत्तर प्रदेश : Pin-212218

यह भी पढ़ें : 

https://thesahitya.com/mulk-apna-aman-chahta-hai-kavita/

Similar Posts

  • हिन्दी की बात | Hindi ki Baat

    हिन्दी की बात ( Hindi ki Baat ) कहने कोहम हिन्दी को बहुत मानते हैंऔर बच्चों का प्रवेशअंग्रेजी माध्यम में करवाते हैं।ओ! दोहरी मानसिकता के लोग,मातृभाषा से दूर रहकरबच्चे का विकास होगा क्या?मातृभाषा तो सहज हीहर शिशु सीख लेता है,तो हम उस बस्ते के बोझ के साथक्यों अंग्रेजी का बोझ डालें?हिन्दी को जीवन काक्यों ना…

  • सीता कहे दर्द | Kavita Sita Kahe Dard

    सीता कहे दर्द ( Sita Kahe Dard ) बड़ी दर्द भरी मेरी कहानी। अँखियो में ला दे सबकी पानी।। जिनके लिए धरा पर थी आई। उन्हीं के द्वारा गई सताई।। वन को गई थी मैं प्रभु जी संग। रंग कर प्रभु की प्रीति-भक्ति रंग।। सृष्टि हितार्थ अग्नि में समाई। मेरी छाया मेरा पद पाई।। दुष्ट…

  • तस्वीरें भी कुछ कहती हैं

    तस्वीरें भी कुछ कहती हैं   आज मेरे सामने एक तस्वीर नहीं , अनेकों तस्वीरें पड़ी हैं  | अपनी – अपनी व्यथा , दुख और दर्द को लेकर खड़ी हैं | ? आज माँ की तस्वीर को देखा , जो नम आँखों से मुझे देख रहीं थीं , आपनी ममता और स्नेह से दुलार रहीं…

  • उगता सूरज | Kavita Ugta Suraj

    उगता सूरज ( Ugta Suraj )   उगता सूरज हम सबको बस यही बताता है! हार न मानें ढलके भी फिर से उग आना है!! विमुख नहों कर्मों से अपने कभी न हिम्मत हारें! एक दिन हम इतिहास रचेंगे जब दृढ़ प्रतिज्ञ हों सारे!! मोती पाता वही है जग में जिसको जोखिम भाता! कर्मों से…

  • साथ दो तुम अगर | Kavita Saath do Tum Agar

    साथ दो तुम अगर ( Saath do tum agar )    साथ दो तुम हमारा अगर, जिन्दगी भर बन हमसफ़र। चाहे वक्त की हो कई मार, बनके रहना कश्ती पतवार।। देना सारे मुझको अधिकार, कभी न छोड़ना तू मझदार। स्नेह बरसाना व देना प्यार, बनकर रहना तू समझदार।। कर्म होता जीवन का सार, और कर्म…

  • कर गया है वो बेआबरु आज फ़िर

    कर गया है वो बेआबरु आज फ़िर     कर गया है वो बेआबरु आज फ़िर! प्यार की जब की है  गुफ़्तगू आज फ़िर   देखकर मोड़ लेता था चेहरा अपना हो गया वो चेहरा रु -ब -रु आज फ़िर   भूलकर दर्द ग़म जिंदगी के सभी कर रहा हूँ ख़ुशी जुस्तजू आज फ़िर  …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *