Kavita aakhri salaam

वो आखरी सलाम था | Kavita aakhri salaam

वो आखरी सलाम था

( Wo aakhri salaam tha )

 

सीमा से तिरंगे में लिपटा वो अमर सपूत घर आया
नैनों से अश्रुधारा बहती सबका कलेजा भर आया

जिसके जोश जज्बे का कायल हर दिलवाला था
वो देशभक्त मतवाला था वो देशभक्त मतवाला था

भारत मां का लाड दुलारा वो राष्ट्रप्रेम पुजारी था
बहना का भाई रक्षक दुश्मन पर कितना भारी था

धन्य धन्य वो मात पिता घर में ऐसा बेटा आया
घर की पावन देहरी आंगन जग रोशन कर आया

सरहद पे सजग रहता तूफानों से पड़ता पाला था
वो देशभक्त मतवाला था वो देशभक्त मतवाला था

अमर शहीद नमन करने उमड़ पड़ता सब गांव था
भाव भरा हृदय सारा अधरो पे लाल का नाम था

वीर वीरांगना नारी का वीर अमर सुहाग कर गया
तोपों से तब दी गई सलामी श्रद्धा से दिल भर गया

खतरों से खेल खेलता वो सरहद का रखवाला था
वो देशभक्त मतवाला था वो देशभक्त मतवाला था

गोला बारूद की भाषा में दुश्मन से भीड़ जाता वो
शीश चढ़ाकर सीमा पर माटी का कर्ज चुकाता वो

अमर सपूत सेनानी पिता की आंखों का तारा था
सिंदूर भार्या सौभाग्य जननी का राजदुलारा था

अमर रहे तू अमर रहे सपूत जिंदाबाद हवाला था
वो देशभक्त मतवाला था वो देशभक्त मतवाला था

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

प्रथम हो शिक्षक का सम्मान | Geet shikshak ka samman

Similar Posts

  • Romantic Poetry In Hindi | Hindi Kavita -कल्पना

    कल्पना (Kalpana )   नमक है पोर पोर में सुन्दर बडी कहानी तेरी। सम्हालोगी कैसे  सूरज  सी गर्म जवानी तेरी।   भँवर बन कर हुंकार डोलता है तेरे तन मन पे। हृदय के कोने में अब भी है वही निशानी तेरी।   रूप  तेरा ऐसा की देख, सभी का यौवन मचले। कुँवारो का  दिल जैसे …

  • पुरवा बयार बहे | Purwa bayar bahe

    पुरवा बयार बहे ( Purwa bayar bahe )   केतकी गुलाब जूही चम्पा चमेली, मालती लता की बेली बडी अलबेली। कली कचनार लागे नार तू नवेली, मन अनुराग जगे प्रीत सी पहेली।   पुरवा बयार बहे तेज कभी धीमीं, बगियाँ में पपीहे की पीप रंगीली। बारिशों की बूँदे बनी काम की सहेली, रागवृत रति संग…

  • आकर्षण है पाप में | Akarshan hai Pap Mein

    आकर्षण है पाप में ( Akarshan hai pap mein )   जीवन की सुख-शान्ति, दग्ध हो जाये न अनुताप में। सदा सजग होकर रहना है, आकर्षण है पाप में। कुत्सित छलनायें आती हैं, कृत्रिम रूप संवार कर। सहज नहीं स्थिर रह पाना, मन को उन्हें निहार कर। एक-एक पग का महत्व है, पथिक सशंकित रहना!…

  • ये ऐसी मुहब्बत है साहब | Aisi Muhabbat

    ये ऐसी मुहब्बत है साहब ( Yeh aisi muhabbat hai sahab )    ये ऐसी मुहब्बत है साहब जो पूॅंछकर न की जाती, दिल-दिमाग एवं जोश-होश के साथ ये की जाती। जटिल से जटिल कठिनाइयों से भी ये निपट लेती, उदास चेहरे पर भी ख़ुशियो की लहर छोड़ जाती।। दुनियां इसको बेवजह शक्ल एवं कपड़ो…

  • अधर में आदमी | Kavita adhar mein aadmi

    अधर में आदमी ( Adhar mein aadmi )   अधर आदमी लटक रहा नीचे विषधर फैले हैं। भगवान रखवाला सबका जीवन के झमेले हैं।   जो दिग्गज है जोर उनका वही डोर हिलाते हैं। जो कमजोर पड़ा वक्त पे धराशाई हो जाते हैं।   महंगाई ने कमर तोड़ दी भागमभाग जिंदगी सारी। भ्रष्टाचार ने फन…

  • कशिश | Kavita

    कशिश ( Kashish )   एक कशिश सी होती है तेरे सामने जब मैं आता हूं दिलवालों की मधुर बातें लबों से कह नहीं पाता हूं   मन में कशिश रहने लगी ज्यों कुदरत मुझे बुलाती है वर्तमान में हाल बैठकर दिल के मुझे सुनाती है   प्रकृति प्रेमी बनकर मैं हंसकर पेड़ लगाता हूं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *