Kavita Aao Shikhe

आओ सीखें | Kavita Aao Shikhe

आओ सीखें

( Aao Shikhe )

आओ सीखे फूलो से
काटों के संग भी रहना
तोड़ अगर उसको ले कोई
तो उसे कुछ न कहना
आओ सीखे पेड़ो से
दूसरो के लिए जीना
दूसरों को जीवन दे कर के
खुद जहर हवा का पीना
आओ सीखे सूरज से
सदा चमकते रहना
चाहे जो हो परिस्थित
सदा काम अपना करना
आओ सीखे छडी से
दूसरो को राह दिखाना
लाचारो के काम है आता
उनको मंजिल तक पहुंचाता
आओ सीखे पुस्तक से
चुप रह कर हर सवाल का जवाब बताना
जीवन भर साथ निभाना
भले-बुरे में फर्क बताना

कामरान

कक्षा 9, गांव बनकसही
जवाहर इंटर कॉलेज नवाबगंज
ब्लॉक नवाबगंज डिस्ट्रिक्ट बहराइच
पिन कोड 271865

यह भी पढ़ें :-

हम नन्हे बच्चे हैं | बाल साहित्य रचना

Similar Posts

  • हम सबके सियाराम

    हम सबके सियाराम   विराजे अयोध्या धाम देखो हम सबके सियाराम । गर्वित हो गया हिंदोस्तान देखो हम सबके सियाराम । मर्यादा का पालन करते दोष दूसरो पर न धरते । सुख दुख सम समझो सिखलाते सत्य विजय सबको दिखलाते । सबका करें कल्याण गर्वित हो गया हिदोस्तान । हम सबके सियाराम । माता पिता…

  • मेरे हिस्से का प्रेम

    मेरे हिस्से का प्रेम मैं तुम सेदूर हूँधूप और छाँव की तरहपुष्प और सुगंध की तरहधरा और नील गगन की तरहदिवस और निशा की तरहजनवरी और दिसम्बर की तरहसाथ-साथ होते हुए भीबहुत दूर- बहुत दूर परन्तुप्रति दिन मिलता हूँतुम सेतुम्हारी नयी कविता के रूप मेंनये शब्दों के रूप में जीवन मेंकभी कोई सुयोग बना..तोमैं तुम…

  • स्वतंत्रता

    स्वतंत्रता   नभ धरातल रसातल में ढूंढ़ता। कहां हो मेरी प्रिये  स्वतंत्रता।। सृष्टि से पहले भी सृष्टि रही होगी, तभी तो ये बात सारी कहीं होगी, क्रम के आगे नया क्रम फिर आता है, दास्तां की डोर बांध जाता है।। सालती अन्तस अनिर्वचनीयता।।                        …

  • बदल रहा है जीवन का ही सार

    बदल रहा है जीवन का ही सार कहने को तो बदल रहा है,जीवन का ही सार। यूं तो शिक्षा के पंखों से,भरकर नयी उड़ान।बना रही हैं आज बेटियां,एक अलग पहचान।फिर भी सहने पड़ते उनको,अनगिन अत्याचार।कहने को तो बदल रहा है,जीवन का ही सार। तोड़ बेड़ियां पिछड़ेपन की,बढ़ने को हैं आतुर।इधर-उधर मन के भीतर पर,बैठा है…

  • यह मुझको स्वीकार नहीं | Kavita Yah Mujhko

    यह मुझको स्वीकार नहीं ( Yah mujhko swikar nahin )   निज पथ से विचलित हो जाऊं यह   मुझको   स्वीकार    नहीं पहन   बेड़ियां   पग  में  अपने झुकने     को     तैयार    नहीं। देख   नीर  बहती  आंखों  में क्रोध   शीर्ष   चढ़  जाता   है आंख  मूंद   कैसे  सह  जाऊं सहन   नहीं    हो   पाता  है। लुटे   अस्मिता   ठीक   सामने क्या  …

  • नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना | Kavita

    नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना ( Naina bawre dhoondhe meet purana )   नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना पल-पल ढूंढे बीता सावन ढूंढे बीती रतिया नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना ?☘️? जिन बगिया में फूल खिले थे जिनमें बीते सावन जिस घर में था संग तुम्हारा ढूंढे वोही आँगना नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना ?☘️?…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *