Kavita akshay tritiya shubh ghadi

अक्षय तृतीया शुभ घड़ी | Kavita Akshay Tritiya Shubh Ghadi

अक्षय तृतीया शुभ घड़ी

( Akshay tritiya shubh ghadi )

 

अक्षय हो सुख समृद्धि भरा रहे भंडार।
जीवन में यश कीर्ति का हो जाए संचार।

 

अक्षय तृतीया शुभ घड़ी मंगलदाई हो योग।
परिणय सूत्र में बंध युगल पाते पावन संयोग।

 

पावन तिथि को करे दान धर्म का काम।
अक्षय धन पात्र रहे जग में मिलता नाम।

 

शुभ तिथि को जन्म लिया भगवन परशुराम।
सत्य सनातन रक्षक त्यागी तपस्वी निष्काम।

 

मांगलिक सब काज करे लेकर हरि का नाम।
विघ्न बाधा दूर हटे पूर्ण होते हमारे सब काम।

 

दीन हीन सेवा करें अक्षय मिलता कोष।
मोती लुटाए प्रेम के तजकर मन का रोष।

 

बल बुद्धि वैभव मिले अक्षय मान-सम्मान।
पूजन करे श्रीहरि का भाग्य हो बलवान।

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

बाल कविता | Bal kavita

Similar Posts

  • Kavita | कुंभ की धार्मिक महत्व

    कुंभ की धार्मिक महत्व ( Kumbh ka dharmik mahatva )   सनातन धर्म की पौराणिकता को, याद दिलाता है यह कुंभ । बारह वर्षों में एक बार ही , आता है यह कुंभ ।   सभी देवों का धरती पर , होता जिस पल आगमन । संघ साधु संत के सानिध्य का , अवसर दे…

  • वक़्त

    वक़्त ** वक़्त ने वक़्त से जो तुझको वक़्त दिया है, हृदय पर रखकर हाथ बोलो- साथ तूने उसके क्या सुलूक किया है? कभी गंवाए हो बेवजह- नहीं कभी सुनी उसकी, ना ही की कभी कद्र ही; यूं ही तेरे पांव से जमीं नहीं खिसकी। पढ़ाई के दौर में लड़ाई में रहे व्यस्त, देखो कहीं…

  • बेजुबां परिवार | Bezubaan parivar

    बेजुबां परिवार ( Bezubaan parivar )    साथ में है सभी तो, लगता है परिवार एक। बिखर जाऐ अभी तो, पत्थर लगते है अनेंक।। विचलित करती है हमें, पत्थरो से बनी ये तस्वीर। जरा सोचिऐ तो सही, ध्यान लगाकर इस और।। पत्थर से बनें है ये इन्सान, परिवार है लेकिन बेजुबान। आईना अपनी कहानी कह…

  • भारत की वर्तमान दुर्दशा

    भारत की वर्तमान दुर्दशा बेरोज़गारी के अंधकार में,भटक रहे हैं युवा इस द्वार में।सपने सब कागज़ हो गए,संघर्ष के पल और गहरे हो गए। महंगाई की आग बढ़ी,हर घर की थाली सूनी पड़ी।रोटी के लिए मेहनत हार गई,सुकून की नींद अब दूर हो गई। नेताओं का गिरता स्तर,वादे बनते जुमलों का सफर।चुनावी भाषण झूठे निकले,जनता…

  • आखरी सत्य | Kavita Aakhri Satya

    आखरी सत्य ( Aakhri Satya ) बहुत दिनों से मेरी फड़क रही थी आँखे। कोई शुभ संदेश अब शायद मिलने वाला है। फिर एकका एक तुम्हें आज यहाँ पर देखकर। दिल अचंभित हो उठा तुम्हें सामने देखकर।। बहुतों को रुलाया हैं जवानी के दिनों में। कुछ तो अभी जिंदा है तेरे नाम को जपकर। भले…

  • हिन्दी कविता मजदूर | Poem by Roshan Sonkar

    हिन्दी कविता मजदूर ( Hindi Kavita Majdoor )    मजदूर का न कोई नेता न मजदूर की कोई सरकार । किसे सुनाए दुखड़ा अपनी किसकी करे पुकार । एक मजदूर गया मजदूरी को काम हुआ,पच्चास का मालिक ने दिया तीस बुदबुदा के बोला अब नही आऊंगा, है मालिक तानाशाह घर आकर देखा पत्नी लिए चारपाई…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *