Kavita bachpan aangan mein khela

बचपन आंगन में खेला | Kavita bachpan aangan mein khela

बचपन आंगन में खेला

( Bachpan aangan mein khela )

 

नन्हे नन्हे पाँवों से जब,बचपन आँगन में खेला।
मेरे घर फिर से लगता है,गुड्डे गुड़ियों का मेला।।

खाली शीशी और ढक्कन में, पकवान भी खूब सजें
डिब्बों पीपों में लकड़ी संग, रोज ढोल भी खूब बजें

खिड़की के पीछे जा जाकर, टेर लगाना छिप छिप कर
अब तो रोज पढ़ाई होती, दीवारों पर लिख लिख कर

सुबह शाम और दोपहर में, लगता मिट्टी का रेला।
मेरे घर फिर से लगता है,गुड्डे गुड़ियों का मेला।।

बाजारों की सभी दुकानें, आँगन में है सज जाती
कागज के टुकड़ो से खुशियाँ, पल भर में ही मिल जाती

पल भर में ही गाड़ी उसकी, चंदा तक ले जाती है
पल भर में होली आ जाती, दीवाली मन जाती है

आँगन में आ जाती ट्रेन, आता आँगन में ठेला।
मेरे घर फिर से लगता है,गुड्डे गुड़ियों का मेला।।

 

🌸

कवि भोले प्रसाद नेमा “चंचल”
हर्रई,  छिंदवाड़ा
( मध्य प्रदेश )

 

यह भी पढ़ें : –

आदमी बढ़ने लगा | Poem aadmi badhne laga

Similar Posts

  • चहुंओर युद्ध हो रहे हैं | Chahunor

    चहुंओर युद्ध हो रहे हैं ( Chahunor yudh ho rahe hai )    चहुंओर युद्ध हो रहे हैं बात सब बुद्ध की कर रहे हैं चहुंओर अधर्म का है जोर और धर्म का सब तरफ है शोर कथनी करनी में इतना भेद हे मानव ! मानस में तेरे कितने छेद? समझ से है परे तब…

  • इंटरनेट की दुनिया | Kavita internet ki duniya

    इंटरनेट की दुनिया ( Internet ki duniya )   इंटरनेट का आया जमाना मोबाइल चलन हुआ कर लो दुनिया मुट्ठी में लाइव चैटिंग फैशन हुआ   मोबाइल में जान तोते की भांति मन में बसने लगा साइबर अपराध बढ़ गए ठग नेट पर ही ठगने लगा   ऑनलाइन क्लासे चलती गुरुकुल विद्या आए कैसे बैंकिंग…

  • जागो जनता जागो | Kavita Jaago Janta Jaago

    जागो जनता जागो! ( Jaago janta jaago)    घंटों इंतजार क्यों करते हैं? सर्दी गर्मी बारिश सहते हैं पलकें बिछाए रहते हैं आप जनता मालिक हैं। लूटने वाले का जयकारा लुटने वाले ही लगाते हैं यह ठीक नहीं। दुर्भाग्य वतन का औ सौभाग्य राजवंशों का? लोकतंत्र हो आया, पर हकीकत बदल न पाया। अशिक्षा गरीबी…

  • चंद्रयान तीन | Poem in Hindi on Chandrayaan 3

    चांद पर भारत ( Chand par Bharat )   चांद की धरती पर ,भारत ने पांव पसार लिया ब्रम्हांड के नवयुग मे,खुद को संवार लिया विश्व की नजरें गड़ी ,भारत की वैज्ञानिकता पर करते थे उपहास जो,गिर गए अपनी ही निजता पर रुआब नही अभिमान नहीं,यही भारतीय सभ्यता लेकर साथ चलने की ,यही है कार्तव्यता…

  • शिव | Shiv ji par kavita

    शिव ( Shiv )   जो आरम्भ है, अनादि है, सर्वश्रेष्ठ है, जो काल, कराल, प्रचंड है, जिनका स्वरूप अद्वितीय है, जिनका नाम ही सर्वस्व है, शिव है, सदा शिव है। मस्तक में जो चाँद सजाये, भस्म में जो रूप रमाये, गंगप्रवाह जो जटा मे धराये, मंथन को जो कण्ठ में बसाये, शिव है, सदा…

  • नामुमकिन है | Namumkin hai

    नामुमकिन है ( Namumkin hai )    काजल की कालिख हर ले काजल, नामुमकिन है। नफ़रत का नफ़रत से निकले हल, नामुमकिन है। हम जैसा बोएँगे, वैसा ही तो काटेंगे, दुष्कर्मों का निकले शुभ प्रतिफल, नामुमकिन है। दुख-दर्दों, संघर्षों के कटु अनुभव भी देगा, जीवन सुख उपजाएगा अविरल, नामुमकिन है। उनके आश्वासन का मित्रो कोई…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *