इक भॅवरा

इक भॅवरा | Kavita Ik Bhanwara

इक भॅवरा

( Ik Bhanwara )

इक भॅवरा है मस्त मिलोगे
करता है गुन्जार मिलोगे

कहता है वो कली से जाकर
क्या मुझको स्वीकार करोगे

कली खिली और खुलकर बोली
कहो मेरी हर बात सुनोगे

छोड़ के मुझको किसी कली से
तुम नजरें न चार करोगे

बोलो मुझको प्यार करोगे
भंवरा बिन सकुचाते बोला

मानूगा तुम जो भी कहोगे
शर्त है इतनी अपनी खुशबू

गुलशन मे तुम नहीं भरोगे
जान के एक-दूजे की नीयत

दोनो ही चुपचाप रहे
कि कली महकना न छोड़ पाएगी

तुम भी भंवरे गुन्जार करोगे
इक भंवरा है मस्त मिलोगे..

Abha Gupta

रचना: आभा गुप्ता

इंदौर (म.प्र.)

यह भी पढ़ें :-

बेवजह | Laghu Katha Bewajah

Similar Posts

  • आडंबर | Adambar

    आडंबर ( Adambar )    पुकारता वह रह गया भाई कोई बचा लो मुझे, भीड़ व्यस्त थी बहुत किन्तु वीडियो बनाने में! ठंड में बेहद ठिठुर रहे थे बेतहाशा गरीब, लोग थे मशगूल फिर भी चादरें चढ़ाने में! मर गया भूख से अखिर तड़प तड़प कर, फेंक रहे थे बचा हुआ खाना कूड़ेदान में! खाली…

  • हाथी घोड़ा और पालकी | Krishna Bhajan

    हाथी घोड़ा और पालकी ( Haathi ghoda aur palki )    हाथी घोड़ा और पालकी, जय बोलो कंहैयालाल की। केशव माधव गोपाल की, गोकुल लाला नंदलाल की। भक्तों के प्रतिपाल की, वृंदावन बिहारी लाल की। मां यशोदा के लाल की, बाल कृष्ण गोपाल की। जय द्वारका नाथ की, मेरे प्यारे दीनानाथ की। जय बोलो हरि…

  • नीला रंग | Neela Rang par Kavita

    नीला रंग ( Neela rang )    नीलगगन नीला अंबर हमको देता ऊंची उड़ान। नीली छतरी वाला ऊपर सब देखे छतरी तान। अगम अगोचर अविनाशी है नीलकंठ महादेव। लीलाधारी है श्रीकृष्ण नील अश्व वर्ण शनिदेव‌। सम्मोहन आकर्षण शक्ति जो पियूष भी है प्यार भी। सिंधु में हिलोरे उठती जोड़े आत्माओं के तार भी। पौरुष बल…

  • संत कुमार सारथि की कविताएं | Sant Kumar Sarthi Poetry

    गजानन प्रथम पूज्य अधिदेव गणेशा,विघ्न विनायक अनुपम वेशा।भाद्र मास शुक्ल बुद्धवारा,लिया चतुर्थी को अवतारा।शंकर सुवन उमा महतारी,तेरी महिमा अद्भुत न्यारी।एकदंत लंबोदर रूपा,निश दिन पूजे सुर नर भूपा।पीत वसन वर मुद्रा धारी,सब जग के तुम हो हितकारी।चढे़ पुष्प फल मोदक मेवा,देवन में हो अधिपति देवा।पाश परशु त्रिशूल है धारे,कार्तिक जैसे भाई प्यारे।रिद्धि और सिद्धि संग नारी,स्वास्तिक…

  • अद्वैत दर्शन की गाथा

    अद्वैत दर्शन की गाथा ब्रह्म से हम, ब्रह्म में समाहित,यही सत्य है, जीवन का उद्देश्य।अहं ब्रह्मास्मि, आत्मा का स्वर,अद्वैत में बसा, जीवन का मर्म। न कोई भेद है, न कोई दूरी,सब एक हैं, यही सत्य की पूरी।ब्रह्म साकार, ब्रह्म निराकार,एक ही शक्ति, आत्मा का दुआर। जीवन की धारा, एक ही प्रवाह,आत्मा और ब्रह्म, दोनों का…

  • हरियाणा दिवस | Haryana Divas

    हरियाणा दिवस ( Haryana divas )    गौरवशाली है हरियाणा सद्भावो की बहती धारा। जहां प्रीत की सरिता बहती वो हरियाणा प्यारा। वीर जुझारू जन्मे जहां सीमा खड़े सेनानी वीर। यदुवंशियों की पावन धरा दुग्ध गंगा मीठा नीर। हरियाणा हरियाली भरा खेती बाड़ी करें किसान। हल की नोक लिए लिखते हल ही कृषक निशान। पशुपालन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *