Pyar wala shayari

प्यार करने की हो गयी भूल है | Pyar wala shayari

प्यार करने की हो गयी भूल है

( Pyar karne ki ho gayi bhool hai )

 

 

प्यार करने की हो गयी भूल है ?

अब सताती दिल को रही भूल है

 

ख़ा गया हूँ दग़ा करते करते वफ़ा

करनी सबसे बड़ी आशिक़ी भूल है

 

तौबा की है ख़ुदा से बहुत आज तो

एक यारों पीनी मयकशी भूल है

 

दिल पर पत्थर लगे है दग़ा के वहां

हाँ मगर जाना उसकी गली भूल है

 

प्यार इंकार वो कर गया जब मिला

दोस्त उसके लिए बेकली भूल है

 

पत्ती पत्ती सी बेदर्द वो  कर गया

प्यार की उसको देनी कली भूल है

 

प्यार उस बेवफ़ा से आज़म है किया

मेरी ही जीस्त की ये  बड़ी भूल है

 

❣️

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

 

मुझको दिखाता हर लम्हा गरूर है | Heart Touching Ghazal in Hindi

Similar Posts

  • 21 वीं सदी का यथार्थ

    21 वीं सदी का यथार्थ देव संस्कृति देव भाषा देव लोक की विदाई मानव का प्रौद्योगिकीकरण जड-चेतन का निशचेतन छायावाद का प्रचलन चार्वाक का अनुकरण कृत्रिम इच्छा का सृजन कृत्रिम मेधा का उत्पादन बाजारों के बंजारें आत्ममुग्धता की उपभोक्तायें मानवता का स्खलन सभ्यता का यांत्रिकरण बिलगेटस,मस्क का खगोलीकरण अंबानी,अडानी का आरोहण मूल्यों-नीतियों का मर्दन रक्तबीजों…

  • बादल | Badal par kavita

    बादल ( Badal ) *** ओ रे ! काले काले बादल, बरस जा अब, सब हो गए घायल ! धरती अंबर आग उगल रहे, ऊष्मा से ग्लेशियर पिघल रहे! सूख गए हैं खेतों के मेड़, बरसो जम कर- अब करो न देर । ओ रे ! काले काले बादल… बरसो … हर्षे बगिया, हर्षे मुनिया।…

  • आया रक्षाबंधन का पर्व | Kavita Aaya Rakshabandhan ka Parv

    आया रक्षाबंधन का पर्व ( Rakshabandhan ka Parv ) आया सावन का महीना राखी बांधने आई प्यारी बहना सावन की मस्ती भरी फुहार मधुर संगीत गुनगुनाती मेघो की ढोल ताप पर मां वसुंधरा भी मुस्काती तोड़े से भी ना टूटे जो ये ऐसा मन का बंधन ऐसे प्यारे बंधन को दुनिया कहती रक्षाबंधन तुम भी…

  • संसय | Kavita

    संसय ( Sansay )   मन को बाँध दो दाता मेरे,मेरा मन चंचल हो जाता है। ज्ञान ध्यान से भटक रहा मन,मोह जाल मे फंस जाता है।   साध्य असाध्य हो रहा ऐसे, मुझे प्रेम विवश कर देता है। बचना चाहूं मैं माया से पर, वो मुझे खींच के ले जाता है।   वश में…

  • पापा | Papa

    पापा ( Papa )    वह झुके नहीं वो रुके नहीं वह मेरी बातों पर देखो हंसकर हां कर जाते थे l गुस्सा होने पर मेरे कैसे पास बुला समझाते थेl सही गलत के भेद बता राह नयी दिखाते थे l मेरी लाडो रानी कहकर मुझे सदा बुलाते थे l नपे तुले शब्दों में बोलो…

  • लोग सोचते हैं | Poem log sochte hain

    लोग सोचते हैं ( Log sochte hain )    मगरूर हो रहा हूं बेशऊर हो रहा हूं जैसे जैसे मैं मशहूर हो रहा हूं, लोग सोचते हैं।   वक्त ने सिखा दी परख इंसान की मैं अपनों से दूर हो रहा हूं, लोग सोचते हैं।   दूर हो रहा हूं मगरूर हो रहा हूं मै…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *