Kavita ka shahar

कविता का शहर मेरा | Kavita ka shahar

कविता का शहर मेरा

( Kavita ka shahar mera ) 

 

कविता का शहर मेरा सुंदर सा प्यारा है।
शब्द शब्द मोती सजते गुलजार सारा है।

भावों की धार बहती सुखनवर न्यारा है।
शिल्पी वाणी साधक सुदर्शन सितारा है।

गीत गजल दोहा मुक्तक गीतों की फुहार है।
छंद सोरठा चौपाई कविता की रसधार है।

अलंकार जगमग ज्योति जगाते सब तारे।
मंच माला माइक सब साज थिरकते सारे।

ओज वीर प्रेम रस काव्य की बहती रसधार।
करुण हास्य भक्तिरस शहर का करे श्रंगार।

कवि की कल्पना है मां शारदे का वरदान।
शब्दों का जादू सारा चेहरों की है मुस्कान।

कविता का शहर मेरा रोशन हुआ सारा है।
दिल की इक बस्ती में बज रहा इकतारा है।

 

कवि : रमाकांत सोनी
नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

तुम जादुई इक पारस हो | Tum Paras ho

Similar Posts

  • तरीके से | Tarike se

    तरीके से ( Tarike se )   जो चला गया छोड़कर वह मिला ही था जाने के लिए हर मेल मुक्कमल नहीं होती कुछ लोग मिलते ही हैं मतलब के लिए उसके लिए वक्त बर्बाद ना कर आपके वक्त की कीमत नहीं होगी आज भी छोड़ देगा तुम्हें कल के लिए इस आज की संगत…

  • अनुराग से उजियार

    अनुराग से उजियार जगमग धरती उजियार , स्नेह दीप है आज lहर कण में दीप सजे , हुवा अंधकार बौना l धन की वर्षा विश्व में , करती चंचल लक्ष्मी lसमय और विवेक की , शिक्षा से झोली भरी l माँ से मेवे – मिटाई , पिता से पटाकी lनभ को चंद्रमा तो , घर…

  • कैसी शिक्षा कैसा नाम | Kaisi Shiksha Kaisa Naam

    कैसी शिक्षा कैसा नाम  ( Kaisi shiksha kaisa naam )   क्या है उत्तर क्या है दक्षिण कैसी शिक्षा कैसा नाम भोली भाली कितनी प्यारी जनता को रोटी से काम भाड़ में जाए पढ़ना लिखना अच्छा जीवन अच्छा धाम जो होगा देखा जाएगा पैक बनेगा हर एक शाम किए बिना ही मेहनत कुछ भी राशन…

  • विरह | Poem in Hindi on Virah

    विरह ( Virah )    नयन सुख ले लेने दो प्रियतम तुम जाने से पहले। अधर रस पान करा दो सूरज उग जाने से पहले। सुबह से वही दोपहरी रात कटवावन लागेगी जिया की प्यास बुझा दो मेरी, तुम जाने से पहले। विरह की बात बताऊं, सूना सूना जग लागे है। बहे जब जब पुरवाई,…

  • जय मां भारती | Jai Maa Bharti

    जय मां भारती ( Jai maa bharti )   शत शत बार नमन वंदन कोटि कोटि बार प्रणाम कर गए आजाद गुलामी से लाखों लाखों बार उन्हें सलाम लेकिन,अब बारी हमारी है यदि,देश की माटी प्यारी है देश बचाना होगा सत्ता लोभी से छली,कपटी, टुच्चे और भोगी से नव भारत का निर्माण करें आओ मत…

  • शान्ति दूत | Shanti doot par kavita

    शान्ति दूत ( Shanti doot )   हम है ऐसे शान्ति के दूत, माॅं भारती के सच्चे सपूत। वतन के लिए मिट जाएंगे, क्योंकि यही हमारा वजूद।।   सीमा पर करते रखवाली, सेवा निष्ठा के हम पुजारी। देश भक्त निड़र व साहसी, हर परिस्थितियों के प्रहरी।।   जीना- मरना इसी के संग, बहादूर एवं सैनिक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *