Zid Shayari

वो नहीं ज़िद ठानता | Zid Shayari

वो नहीं ज़िद ठानता

( Wo nahi zid thanta ) 

 

वो नहीं ज़िद ठानता तो मुख़्तलिफ हालात होते
इस चमन में ग़ुल भी खिलता महकते लम्हात होते।

अब बहुत ही मुख़्तसर सी गुफ़्तगू होती हमारी
दिन हुए कुछ इस तरह रस्म़न ज़रा सी बात होते।

जीतने की थी हमें आदत मगर अब हाल है ये
बाजियां उलटी हुई अब रोज़ ही शह मात होते।

वह नहीं है चाहता रिश्ता बचाना दोस्ती का
हमने देखा है उसे रुख़ फ़ेर कर मोहतात होते।

ये हुआ कि हो ख़फा सब खत चला डाले हमीं ने
जो बचा रखते वही माज़ी कि अब सौगात होते।

छोड़ दी हमने अना फ़िर भी नहीं कुछ हाथ आया
काश चुप रहते अगर तो साहिबे औकात होते।

याद है वह सर्द लहज़ा आज भी उस संगदिल का
हो गए हैं दिन बहुत इस नयन से बरसात होते।

 

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

मुख़्तसर- संक्षिप्त
मोहतात- सावधान
गुफ़्तगू- बातचीत
रस्म़न– औपचारिक
माज़ी– बीता वक्त

यह भी पढ़ें :-

एक नगमा प्यार का | Poem Ek Nagma Pyar ka

Similar Posts

  • मज़ा आ गया | Mazaa aa Gaya

    मज़ा आ गया ( Mazaa aa Gaya )  था तो मुश्किल सफ़र पर मज़ा आ गया इक मुसाफ़िर गया दूसरा आ गया इक मुलाकात उस से हुई थी कहीं मेरे घर वो पता पूछता आ गया उसके आते ही लगने लगा है मुझे वक़्त दर पर मेरे ख़ुशनुमा आ गया लुत्फ़ ही लुत्फ़ आने लगा…

  • दुआ से | Dua se

    दुआ से ( Dua se )    रोज़ करता हूँ दुआ मैं वो ख़ुदा से अब शिफ़ा मिले तेरी रब दवा से रब बनाए रख नज़र ऐ रोज़ मुझपर दूर हर पल मैं रहूँ रब हर बला से जिंदगी से दूर खुशियाँ हुई यूं हाँ नमाजो की यहाँ यारों क़ज़ा से हो गया हूँ आज…

  • यूं आहें भरता हूँ मैं | Yoon Aahen Bharta hoon Main

    यूं आहें भरता हूँ मैं ( Yoon aahen bharta hoon main )    दो दिन से भूखा हूँ मैं ? रोठी को तरसा हूँ मैं दूर ग़रीबी न यहाँ हो बरसों से तड़फा हूँ मैं पैसे पूरे मिलते कब मेहनत भी करता हूँ मैं कोई तो भेज यहाँ रब जीवन में तन्हा हूँ मैं मुश्किल…

  • उतर जाओगे | Utar Jaoge

    उतर जाओगे ( Utar Jaoge ) बेवफ़ाई की जिस दिन डगर जाओगेमेरी नज़रों से उस दिन उतर जाओगे दिल की कश्ती अगर सौंप दो तुम मुझेपार दरिया के फिर बेख़तर जाओगे प्यार करने लगोगे जब तुम हमेंहम जिधर जायेंगे तुम उधर जाओगे होश उड़ जायेंगे हुस्न वालों के भीप्यार से मेरे इतना निखर जाओगे हाथ…

  • बहुत देखा | Bahut Dekha

    बहुत देखा ( Bahut Dekha ) भरी बज्म में उनको लाचार बहुत देखाबुझी आँखो में तड़पता प्यार बहुत देखा युँ तो हम भी हमेंशा रहे कायल उनकेबिना वजह के रहे शर्मसार बहुत देखा हमने कभी न देखा वादा खिलाफ होतेसामने आने में इंतजार बहुत देखा सामने सच ला न सकें झूठ बोला न गयामुहब्बत की…

  • लापता कर गया | Ghazal Shayari

    लापता कर गया ( Laapata kar gaya )   तंज़ के तीर सारे चला कर गया। है बिछड़ के बहुत ख़ुश बता कर गया। ज़ख़्म फिर से हमारा हरा हो गया कौन उसका यहां तज़किरा कर गया। दी रिहाई हमें इश्क़ की क़ैद से ख़त्म वो प्यार का सिलसिला कर गया। तोड़ कर दिल हमारा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *