Kavita Kitaben

किताबें | Kavita Kitaben

किताबें

( Kitaben )

 

ज्ञान का अनमोल भंडार किताबें।
सदियों से सुरक्षित रखी गई किताबें।
वेद, पुराण, उपनिषद, प्राचीनतम ग्रंथ हमारे।
हमारी धर्म संस्कृति के वाहक।
किताबों ने हम तक सुरक्षित पहुॅंचाए।
फैलाया ज्ञान प्रकाश चंहुदिस।।

गीता, रामायण ,महाभारत जैसे महान ग्रंथ,
सदियों पहले लिखे गए थे।
किताबों ने ही, हमें ज्ञान कराया इनका।
ये मार्गदर्शन जीवन का करते।।

किताबें ही हैं, जिनका अध्ययन कर,
हम शिक्षक, डॉक्टर ,वकील,इंजीनियर बन पाए।
उच्च शिक्षा प्राप्त कर,
देश विकास में अग्रसर हुए।
परिवार, समाज ,देश की प्रगति में,
किताबों का योगदान, सर्वोपरि है।
हर समस्या का समाधान,
देतीं हमें किताबें।।

चंद्रकला भरतिया
नागपुर महाराष्ट्र

यह भी पढ़ें :-

संकटमोचन हनुमान | Kavita Sankatmochan Hanuman

Similar Posts

  • कल और आज | Kal aur Aaj

    कल और आज ( Kal aur aaj )    पहले जब सात्विक खाते थे, तब हम तंदुरुस्त कहलाते थे। आज केएफसी में जाते हैं, तामसी आहार मंगवाते हैं। पहले घर पर खाना बनता था, शुद्ध और सतोगुणी होता था। आज बाहर से खाना आता हैं, साथ में ढेरों बीमारी लाता हैं। पहले घर पर गेहूं…

  • इतिश्री | Kavita itishree

    इतिश्री ( Itishree )   धीरे धीरे खत्म हो रहा, प्यार का मीठा झरना। उष्ण हो रही मरूभूमि सा दिल का मेरा कोना।   प्रीत के पतवारो ने छोडा,प्रेम मिलन का रोना। अब ना दिल में हलचल करता,मिलना और बिछडना।   पत्थर सी आँखे बन बैठी, प्रीत ने खाया धोखा। याद तो आती है उसकी…

  • याद सताए तेरी सोन चिरैया | Kavita

    याद सताए तेरी सोन चिरैया ( Yad Sataye Teri Son Chiraiya )   कहां गई? वो सोन चिरैया! रहती थी जो सबके घर आंगन चाहे महल हो या हो मड़ैया! कहां गई?? क्या खो हो गई? या रूठ कर हमसे दूर हो गई? भारत मां की थी तू लाडली, मिलजुलकर सबने जिसे थी पाली। करती…

  • माना कि तुम | Love kavita

      माना कि तुम ( Mana ki tum )     माना कि इन हाथों की लकीरों में तुम नहीं….…….. फिर भी मुझमें तुम शामिल हो, लकीरें तो उनके हाथ में भी नहीं होती जिनके हाथ नहीं होते। तुम मुझे हासिल नहीं फिर भी मुझसे तुम दूर तो नहीं हो। इन हाथों की लकीरों में…

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Ghazal -यही जीवन है!

    यही जीवन है! ( Yahi Jeevan Hai ) ***** जीवन पथ में कभी कभी कुछ ऐसा होता है रोम रोम क्षण में पुलकित होता है। धूम धड़ाका पार्टी शार्टी गाजे बाजे संग बाराती प्रीतिभोज की होती तैयारी अधरो पर मुस्कान बिखर जाती चहुंओर खुशियां ही खुशियां नजर है आती। तो कभी एक पल में कर…

  • कान्हा प्यारी छवि तेरी | Kanha kavita

    कान्हा प्यारी छवि तेरी ( Kanha pyari chhavi teri )   खुशियों से दामन भर जाए दीप जलाने लाया हूं। मुरली मोहन माधव प्यारे झोली फैलाये आया हूं।   मन मंदिर में बंसी केशव मधुर सुहानी तान लगे। कान्हा की प्यारी छवि मोहिनी मूरत श्याम लगे।   लेखनी की ज्योत ले माधव तुझे रिझाने आया…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *