मतदान करो

मतदान करो | Kavita Matdan Karo

मतदान करो

( Matdan Karo )

 

कन्यादान को हि कहा गया
दान सर्वोच्च
किंतु, समय की बदलती धारा में
अब, मत दान हि है उच्च

करना है यह पुण्य कर्म सभी को
अत्यावश्यक् है यह धर्म सभी को
इसमें नही भेद भाव उच नीच का
समझना है भविष्य का मर्म सभी को

एक वोट से बदलती देश की तकदीर
नेता सारे लगा रहे अपनी अपनी तदबीर
मत आना तुम झांसे मे किसी के भी
जन हित में करे जो काम उसी को वोट देना

क्यों बँट जाते हो जात पात मे
क्यों बिक जाते हो चंद सिक्कों मे
क्यों लड़ते हो मजहब धर्म के नाम
देश का भविष्य हि आता सबके काम

मतदान करो मतदान करो
बहकावे में खराब मत ईमान करो
पूछेगी सवाल आनेवाली पिढियाँ
बनानी है उन्ही के लिए सीढियाँ

मोहन तिवारी

( मुंबई )

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