Kavita purush ho jana

पुरुष हो जाना | Kavita purush ho jana

पुरुष हो जाना

( Purush ho jana ) 

 

पुरुष के लिए कहा आसान रहा
” पुरुष हो जाना ”
सबको खुश रखना
सब को समझ पाना
सबको संभालना
उसकी कोशिश रही,
सब कुछ सरल बनाना
हां पुरुष ही है ” खुशियों का खजाना ” ।।

पुरुष के लिए कहा आसान रहा
” पुरुष हो जाना ”
यातनाएं सब सहन की ,
परिवार पालने की खातिर ,
सर्दी गर्मी नही देखी जिसने
अपने कर्तव्यों के खातिर ,
” पुरुषत्व “से ही पुरुष हुआ ।
हां पुरुष ही हैं ” खुशियों का खजाना” ।।

पुरुष के लिए कहा आसान रहा
“पुरुष हो जाना ”
उसकी हर खुशी उधार रही
सबकी खुशियों के लिए
करता रहा मेहनत सारी
स्त्री के हर रूप का सहयोगी
जिसकी खुशी से खुश गृहस्थी सभी ,
हां पुरुष ही है ” खुशियों का खजाना ” ।।

 

प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

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