रिश्ता

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रिश्ता

( Rishta )

 

कैसा रिश्ता,कब का

रिश्ता.

सब तो है मतलब का

रिश्ता.

जात,खून,मजहब का

रिश्ता,

सबसे बढिया रब का

रिश्ता.

मिलता नहीं अब *ढब* का

रिश्ता,(ढंग)

गायब प्रेम,अदब का

रिश्ता.

दौलत और *मनसब*का

रिश्ता,(पद/प्रतिष्ठा)

है दोनों मेंं गज़ब का

रिश्ता.

चुंबन से ज्यों *लब*का

रिश्ता,(ओठ)

निभता दिन और*शब*का

रिश्ता।(रात)

दृढ़ है नेक*सबब* का

रिश्ता,(कारण)

टूटता है मतलब का

रिश्ता.

✍️

कवि बिनोद बेगाना

जमशेदपुर, झारखंड

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