किंवदंती

Hindi Poetry On Life | Hindi Kavita | Hindi Poem -किंवदंती

किंवदंती

 ( Kimvadanti )

 

किंवदंती बन हम  प्रेम का,

विचरण करे आकाश में।

जो मिट सके ना युगों युगों,

इस सृष्टि में अभिमान से।

 

मै सीप तुम मोती बनो,

तुम चारू फिर मै चन्द्रमा।

तुम प्रीत की  तपती धरा,

मै मेघ घन मन रात सा।

 

तुम पुष्प मै मधुकर बनूँ ,

मै  पवन  और तुम रागिनी।

हम  दीप बन जलते रहे ,

तुम ज्योति  और  मै बाती।

 

मै कृष्ण की मुरली बनूँ ,

तुम पवन की गति दामिनी।

जो मन को भी झिँझोर दे,

तुम सुर की ऐसी स्वामिनी।

 

 

मै  तीर  तुम  तडकश  बनो,

मै शब्द और तुम भावना।

तुम प्रेम की निश्छल नदी,

जिसे शिव जटा की साधना।

 

जो  गति  रति  से पूर्ण  हो,

तुम  नयन  हो मै ताडना।

किंवदंती है  हम  प्रेम के,

तुम  शेर की  हो  कामना।

 

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

??शेर सिंह हुंकार जी की आवाज़ में ये कविता सुनने के लिए ऊपर के लिंक को क्लिक करे

यह भी पढ़ें : 

Hindi Poetry On Life | मै इक सोनार हूँ

Similar Posts

  • छाया है पिता

    छाया है पिता बरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। पिता करता नहीं दिखावा कोईआँसू छिपाता अन्तर में अपने।तोड़ता पत्थर दोपहर में भी वोचाहता पूरे हों अपनों के सपने।बरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। भगवान का परम आशीर्वाद हैपिता जीवन की इक सौगात है।जिनके सिर पे…

  • ३३ प्रतिशत आरक्षण | 33 Percent Aarakshan

    ३३ प्रतिशत आरक्षण   नारी बिल पारित हुआ मोदी जी ने सम्मान दिया और पूरे भारत ने भी यह माना है नारी शक्ति को फिर से पहचाना है ।। मातृशक्ति सदा रही सहाय , घर में रहे तो खयाल रखे सबका , घर के सदस्यों,परिवार जन का फिर क्यूं उसको रहने दे असहाय।। “राष्ट्रपति मुर्मू…

  • पहचान | Kavita

    पहचान ( Pehchan )   प्रेम के मोती लुटाओ प्रतिभा कोई दिखाओ पहचान  जग  में  कोई  नई  बनाईए सफलता मिल सके पर्वत भी हिंल सके जंग  भरी  दुनिया  में  हौसला  बनाइए लगन से मेहनत रंग जरूर लाएगी पहचान जग में आप ऐसी बनाईए पूर्वजों की साख में चार चांद लग जाए कर्म  पथ  पर  अपनी …

  • खुदगर्जी | Khudgarzi

    खुदगर्जी ( Khudgarzi )   चाहते हो मोल कामयाबी का तो करो कुछ ,कि और भी हों आपसे बनकर तो देखो रहनुमा तुम करोगे राज दिलों में सभी के तुम जीत कर भी हार जाते हैं वो करते हैं गिराकर जो जीत हासिल या छोड़कर साथी को अपने वे हारे हुए हि हैं हर दौड़…

  • जन्मदिवस की बधाई अविनाश | Happy Birthday

    जन्मदिवस की बधाई अविनाश ( Happy Birthday Avinash )    सुबह-सुबह तुम्हें एक पैगाम देना है, जन्म दिवस की तुमको बधाई देना है। गुज़रे सारी उम्र आपकी हॅंसी-खुशी से, आपकी सुबह को नया प्रकाश देना है।। सदैव ख़ुश रहो तुम यू ही अविनाश, आज सूर्योदय आपके लिए है ख़ास। गुलाब फूल लिए इन्तजार है तुम्हारा,…

  • उठ जाग मुसाफिर भोर भई | Geet uth jaag musafir

    उठ जाग मुसाफिर भोर भई ( Uth jaag musafir bhor bhai )    चार दिन की चांदनी है, दो दिन का मेला है। झूठी जग की माया है, झुठा हर झमेला है। मन की आंखें खोल प्राणी, मत पाल तमन्नायें नई। उठ जाग मुसाफिर भोर भई, उठ जाग मुसाफिर भोर भई।   खाली हाथ आया…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *