कितने आलोक समाये हैं | Kitne Alok

कितने आलोक समाये हैं

( kitne alok samay hai) 

 

तुमने जो निशिदिन आँखों में आकर अनुराग बसाये हैं
हम रंग बिरंगे फूल सभी उर-उपवन के भर लाये हैं

हर एक निशा में भर दूँगा सूरज की अरुणिम लाली को
बाँहों में आकर तो देखो कितने आलोक समाये हैं

प्रिय साथ तुम्हारा मिलने से हर रस्ता ही आसान हुआ
हम विहगों जैसा पंखों में अपने विश्वास जगाये हैं

जब -जब पूनम की रातों में तुझसे मिलने की हूक उठी
तेरे स्वागत में तब हमने अगणित उर-दीप जलाये हैं

दिन रात छलकते हैं दृग में तेरे यौवन के मस्त कलश
तू प्यास बुझा दे अंतस की जन्मों से आस लगाये हैं

कैसी मधुशाला क्या हाला तेरे मदमाते नयनों से
हम पी पीकर मदमस्त हुये अग -जग सब कुछ बिसराये हैं

उस पल क्या मन पर बीत गयी मत पूछो साग़र तुम हमसे
तुमने व्याकुल रातों में जब -जब गीत विरह के गाये हैं

 

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

 

यह भी पढ़ें:-

इक इक करोड़ के | Emotional Heart Touching Shayari

Similar Posts

  • होली में

    होली में किया जख़्मी उसी ने है मुझे हर बार होली मेंगुलो के रंग से मुझपर किया जो वार होली में नही रूठों कभी हमसे भुला भी दो गिले सारेतुम्हारे ही लिए लाएँ हैं हम यह हार होली में रही अब आरजू इतनी कि तुमसे ही गले लगकरबयां मैं दर्द सब कर दूँ सुनों इस…

  • जवानी | Ghazal Jawani

    जवानी ( Jawani ) जब जवानी ने खेल खेले थे हर तरफ फूल थे व मेले थे हम कभी भूल ना सकेंगे की फूल के साथ हम अकेले थे हां, झमेले भी थे मगर यारों वे सुगंधित हसीं झमेले थे काम था नाम था जवानी थी जेब में लाख लाख धेले थे वास्ता सिर्फ था…

  • मुस्कुराना छोड़ दूं | Muskurana Chhod Doon

    मुस्कुराना छोड़ दूं ( Muskurana chhod doon )    वो ख़फ़ा गर हैं तो क्या मैं मुस्कुराना छोड़ दूं। खौफ़ से उनके मैं क्या नग़मे सुनाना छोड़ दूं। ठीक है सरकार की नज़रे इनायत चाहिए क्या मगर इसके लिए सारा जमाना छोड़ दूं। लाख कोशिश की मगर फिर भी नहीं खुश है कोई क्या करूं…

  • तुम्हारे बाद | Tumhare Baad

    तुम्हारे बाद ( Tumhare Baad ) साँसें थमी हैं ख़त्म भी किस्सा तुम्हारे बादबिखरा है मेरा जिस्म सरापा तुम्हारे बाद कतरे से हो गए हैं समुंदर तवील सेख़ुद पे रहा न हमको भरोसा तुम्हारे बाद कैसे सुनाएं बज़्म में क़िस्सा-ए-इश्क़ हमशाइर बना है दिल ये हमारा तुम्हारे बाद मझधार में खड़े हैं मनाज़िर अजीब हैंकैसे…

  • वो चाहें हो कुछ हंगामा | Vo Chahe

    वो चाहें हो कुछ हंगामा ( Vo chahe ho kuch hungama )   वो चाहें हो कुछ हंगामा, बन जाए कोइ फसाद नया ! इस पावन भू में फैल सके, कोई हिंसक उन्माद नया !! मतलब की बातों के बदले, मुद्दे बेमतलब उठा रहे अपनी ही बनाई बातों पर,करने लगते प्रतिवाद नया !! कहते खुद…

  • उसका जलवा कमाल है अब भी

    उसका जलवा कमाल है अब भी उसका जलवा कमाल है अब भीवो नही तो मलाल है अब भी देख उसको यही सदा कहते ।जान तुझ पर निहाल है अब भी वो जो उसने कभी नही पूछालब पे वो ही सवाल है अब भी सुर्खी जितनी लगा रही लब परसुर्ख उतने तो गाल है अब भी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *