कुंदन बना दिया

कुंदन बना दिया | Kuundan Bana Diya

कुंदन बना दिया

( Kuundan Bana Diya )

रक्तरंगी हादसों ने काम ये किया
शारदा की साधना में रंग भर दिया

आसमाँ की चाह थी ना आसमाँ मिला
भूमि पर भी चैन मुझे लेने ना दिया

सात फेरे भूख से है प्यास से लीव ईन
वक्त ने दो पाट को बीवी बना दिया

स्वप्नमाला से लदा मैं ले गया बारात
एन मौके प्यार ने ‘हाँ’ को भुला दिया

बावफा ने बेवफा की अर्ज की कबूल
बेवफाई का मुगट खुद ही पहन लिया

खोजता हूँ आज भी गम के किनारे को
आस-तट कोई मुझे दिखाई ना दिया

सोचता हूँ मैं सदा तन्हाई में ये बात
पीड ने क्या चित्त से सबकुछ मिटा दिया

लेटकर अपनी चिता पे गुनगुनाता हूँ
आज मैंने मौत को दुल्हन बना दिया

पूजता है जिन्दगी की आँच को ‘कुमार’
स्वर्ण को निखार के कुंदन बना दिया

कुमार अहमदाबादी

यह भी पढ़ें:-

सावन | Sawan

Similar Posts

  • हे कृष्ण मुरारी | Hey Krishna Murari

    हे कृष्ण मुरारी  ( Hey Krishna Murari ) हे!कृष्ण मुरारी तुम्हें फिर इस धरा पर आना होगा छोड़ बाँसुरी की मधुर तान व्यभिचारी दुःशाशनों से द्रोपदी का चीर बचाना होगा नारी आज अबला नहीं सबला है ये अहसास उन्हें कराना होगा उनके भीतर काली और दुर्गा के स्वरूप से रूबरू कराना होगा स्त्री की इज्जत…

  • मुक्तक | Muktak

    मुक्तक ( Muktak )   1 सच जो लिख न सके वो कलम तोड़ दो, ये सियासत का  अपने  भरम  तोड़ दो, इन गुनाहों   के  तुम  भी  गुनहगार  हो, यार सत्ता  न  संभले  तो  दम  तोड दो।। 2 भटक रहा हूँ मैं अपनी तिश्नगी के लिए.. ज़रूरी हो गया तू मेरी जिन्दगी के लिए.. फक़त…

  • भारतीय संस्कृति और सभ्यता

    भारतीय संस्कृति और सभ्यता   हमारी संस्कृति है महान देवताओं का वरदान l सरलता सादगी में आता है जीना l छोटी-छोटी बातों छोटी-छोटी खुशियों की हमें कोई कमी ना। वृक्ष ,पर्वत, नदियों से है गहरा नाता l कण-कण में हमें ईश्वर है नजर आता l जहां पराया दुख अपना लगता हैl भाईचारे का रखे सबसे…

  • माँ का अंश | Maa ka ansh par kavita

    माँ का अंश ( Maa ka ansh )   साँसों का चलना ही जीना होता तो मकसद क्यूं बनते, आपका जाना भी मकसदों का मिटना है माँ- थोड़े और दिन तो मेरे मकसदों का हिस्सा बनते। मैंने पाया है चाहे लाख गुना, पर दिल की गुज़ारिशों के आगे सब फीके लगते, आपका अंश मैं आप…

  • दस्तूर | Dastoor

    दस्तूर ( Dastoor ) दस्तूर दुनिया का ,निभाना पड़ता है ।अनचाहे ही सही ,सब सह जाना पड़ता है ।सच को ही हमेशा ,हमें छुपाना पड़ता है ।वक्त तो चलता जाता ,हमें रूक जाना पड़ता है ।बिना प्रेम के भी कभी ,रिश्ता निभाना पड़ता है ।आते हैं दुनिया में तो ,जीकर जाना पड़ता है ।जज्बातों को…

  • सत्य गुमराह नहीं होता | Satya par Kavita

    सत्य गुमराह नहीं होता ( Satya gumrah nahi hota )   सांच को आंच नहीं होती सत्य गुमराह नहीं होता। सच्चाई छुपती नहीं कभी सच बेपरवाह नहीं होता। श्रद्धा प्रेम विश्वास सत्य के आगे पीछे रहते सारे। सच्चाई की डगर सुहानी दमकते भाग्य सितारे। सत्य परेशान हो सकता सत्य संघर्ष कर सकता। सत्य की जीत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *