लिख रहूं हूँ गीत तेरी याद में
लिख रहूं हूँ गीत तेरी याद में

लिख रहा हूँ गीत तेरी याद में

 

 

लिख रहूं हूँ गीत तेरी याद में

हो गया हूँ जख्मी तेरी याद में

 

गांव जब से तू गया है छोड़कर

रो रहा हूँ दोस्त तेरी याद में

 

अब आयेगा लौटकर तू गांव में

जी रहा हूँ तन्हा तेरी याद में

 

कुछ सकूं दिल को मिलेगा ए सनम

लिख रहा हूँ शेर तेरी याद में

 

दोस्त कैसे मैं हंसू तेरे बिना

आंखों में आंसू है तेरी याद में

 

पल ख़ुशी के तो नहीं तेरे बिना

कट रहा है जीवन तेरी याद में

 

पास आज़म के नहीं है तू जब से

सुन रहा हूं ग़ज़लें तेरी याद में

 

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शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

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