है वो आज़म गुलाब सा चेहरा

है वो आज़म गुलाब सा चेहरा

है वो आज़म गुलाब सा चेहरा

 

 

है वो  आज़म गुलाब सा चेहरा !

जैसा हुस्ने  शबाब सा चेहरा ।।

 

 

मैं पढ़ूँ उसके शब्द उल्फ़त के ।

वो दिखे पर क़िताब सा चेहरा।।

 

देखकर प्यार का नशा होता।

है वो ऐसा  शराब सा चेहरा।।

 

प्यार आता बहुत मुझे उस पर ।

है वो मेरे ज़नाब  सा चेहरा।।

 

नींद से है भरा हंसी चेहरा।

वो लगे जैसे ख़्वाब सा चेहरा ।।

 

हुस्न से महके सांसें आज़म की।

छाया मुझपे शबाब सा चेहरा।।

 

 

✏

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

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