Maa Katyayani

मां कात्यायनी | Maa Katyayani

मां कात्यायनी

( Maa Katyayani ) 

 

पुरुषार्थ सहज सुफलन, मां कात्यायनी आराधना से

वर्तमान विज्ञान प्रौद्योगिकी युग,
मां दुर्गा षष्ठी छवि पूजन विशेष ।
शोध अनुसंधान दक्षता मैया,
जीवन कृपा दृष्टि अधिशेष ।
जन्म जन्मांतर पाप मुक्ति,
ब्रजमंडल अधिष्ठात्री साधना से ।
पुरुषार्थ सहज सुफलन, मां कात्यायनी आराधना से ।।

केहरी आरूढ़ा मात भवानी,
दिव्य आभा चार भुजा धारी ।
दाएं कर अभय वर मुद्रा,
बाएं खड़ग कमल शोभा न्यारी ।
रोग संताप भय मूल विनिष्ट,
मां श्री चरण स्तुति प्रार्थना से ।
पुरुषार्थ सहज सुफलन, मां कात्यायनी आराधना से ।।

महर्षि कात्यायन सुता हित,
सौम्य सुशील नामकरण ।
भगवान श्री कृष्ण कुलदेवी,
पराशक्ति आस्था आवरण ।
सुख समृद्धि आनंद अथाह,
मां भगवती छठवीं शक्ति अर्चना से ।
पुरुषार्थ सहज सुफलन,मां कात्यायनी आराधना से ।।

महिषासुर मर्दिनी पराम्बा दुर्गे,
नवरात्र महिमा अपरम्पार ।
स्वर्ण भास्वर सम भव्य रूप,
साधक मन आज्ञा चक्र धार ।
जीवन पथ सदा शुभ मंगल,
अमोघ फलदायिनी उपासना से ।
पुरुषार्थ सहज सुफलन, मां कात्यायनी आराधना से ।।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/pancham-navratra/

Similar Posts

  • स्वास्थ्यवर्धक है नारंगी | Narangi

    स्वास्थ्यवर्धक है नारंगी ( Swasthya vardhak hai narangi )    आयुर्वेदा में ‌इसके गुणों के फ़ायदे बताएं है अनेंक, गेंद जैसा दिखने वाला गुणकारी यह फल है एक। रंग-रूप एवं स्वाद जिसका है सभी फलों से भिन्न, आसानी से जो मिल जाता नाम इसके है अनेंक।। फल फूल छिलके पत्ते जिसके सभी आते है काम,…

  • मैं आपकी | Kavita Main Aap ki

    मैं आपकी ( Main Aap ki ) जनम -जनम का प्रीति जुड़ा है । सर्वस्व आपसे पूरा है ।। धर्म, हे प्रभु! आप निभाइए। सुमा के भी नाथ कहाइए।। मांग सिंदुरी नित सजती रहे। पाँव पैंजनियाँ बजती रहे ।। कंगन भी मैं तो खनकाऊँ। नित मैं आपकी ही कहाऊँ।। भक्ति- धारा सदा बहाइए। सुमा के…

  • आज की शाम तेरे नाम | Romantic Poem for Wife in Hindi

    आज की शाम तेरे नाम ( Aaj Ki Shaam Tere Naam )    उतर आये सुहाना चांद धरा पे चमन महक जाये दिल की धड़कनें कहती ये शाम तेरे नाम हो जाए अल्फाजों के मोती बरसे हर्ष खुशियां आनंद आए खुशियों की बरसे घड़ियों ये शाम तेरे नाम हो जाए सुख-दुख बांटे बड़े प्रेम से…

  • मैं कितना बदल गया

    मैं कितना बदल गया नस्लें बर्बाद हो गई हमारी आज के इस व्यवहार में,हर कोई आज बिक गया रिश्वत के इस पुरस्कार में।अपनी पर ध्यान नहीं देते पर पराई पर हम देते रहे,अब वो कहां शिष्टाचार बचा है अपनों के संस्कार में।। हम तो रिश्वत से अपना ख्वाब पूरा करना चाहते हैं,आजकल हम एक दूसरे…

  • Prem ki Holi | कविता प्रेम की होली

    प्रेम की होली ( Prem Ki Holi )   खेलेंगे हम प्रेम की होली। अरमानों की भरेगी झोली। खुशियों की बारात सजेगी, बिगड़ी सारी बात बनेगी। नोंक-झोंक कुछ हल्की-फुल्की, होगी हॅंसी-ठिठोली। खेलेंगे हम प्रेम की होली।   महुए की मदमाती गंध, फूलों की खुशबू के संग। आया है दुल्हा ऋतुराज, चढ़कर फाग की डोली। खेलेंगे…

  • भवंर | Bhanwar

    भवंर ( Bhanwar )    चित्त का भवंरजाल भावनाओं की उथलपुथल एक बवंडर सा अन्तस में और हैमलेट की झूलती पक्तियां टू बी और नाॅट टू बी जद्दोजहद एक गहन.. भौतिक वस्तुएं आस पास रहते लोग सामाजिक दर्जे और हैसियत क्षणिक और सतही खुशी के ये माध्यम नही करवा पाते चित्त को आनन्द की अनुभूति……

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *