मन की उलझन

मन की उलझन | Man ki Uljhan

मन की उलझन

( Man ki Uljhan )

मन को क्यों,उलझाना भाई ?
मन से नहीं है ,कोई लड़ाई ।

मन की उलझन ,को सुलझायें ।
गांठ सभी अब ,खुल ही जायें ।

लायें बाहर अब, गुबार सारे ।
जिससे मिटें ,संताप हमारे ।

मन को , जितना उलझायेंगे ।
उतना कष्ट , हम ही पाएंगे ।

सोचें अब ,कोई ऐसी युक्ति ।
पायें हर ,उलझन से मुक्ति ।

मन को क्यों ,उलझाना भाई ?
इससे अपनी , नहीं लड़ाई ।

प्रगति दत्त

यह भी पढ़ें :

सोचो तो सही | Socho to Sahi

Similar Posts

  • राज़ | Kavita Raaj

    राज़ ( Raaj ) दिवाली की रात आने वाली है, पर दिवाली ही क्यों? रोजमर्रा की जरूरत गरीबी ,लाचारी, सुरसा के मुंह की तरह मुंह खोल खड़ी है। जाने क्या गज़ब ढाने गई है वो? लौट के जब आएगी, चंद तोहफ़े लायेगी। भूख ,प्यास से, बिलख रही है उससे जुड़ी जि़दगीयां अचानक अचंभा हुआ—— कुछ…

  • मन में बसे मेरे राम | Mere Ram

    मन में बसे मेरे राम ( Man me Base mere Ram )   मन में बसे मेरे राम…श्रीराम, मन में बसे मेरे राम…। प्रेम से बोलो जय श्रीराम…श्रीराम, मन में बसे मेरे राम…।। श्रृद्धा भाव से मैं आया हूं, यह पावन अयोध्या धाम, अहो भाग्य से ही आया हूं, जन्मभूमि है बानूर ग्राम। ज्ञान अज्ञान…

  • नौसेना दिवस ( 04 दिसंबर )

    नौसेना दिवस ( 04 दिसंबर )   भारत मना रहा है आज नौसेना दिवस, अपार शक्ति के आगे शत्रु सहमने को है विवश। नौसेनिक भी जी जान से करते हैं युद्धाभ्यास, समुद्री रास्ते से ना हो आतंकी हमले प्रयास। याद कर रहे हम उन वीरों को- दिया जिन्होंने सर्वोच्च बलिदान, है आजादी की लड़ाई में…

  • जीवन सारा बीत गया | Jeevan Sara

    जीवन सारा बीत गया ( Jeevan sara beet gaya )    बीत गई वो भोर सुहानी सुंदर सब शामें बीत गई जीवन ये सारा बीत गया सांसे डोर थामे बीत गई बीत गई वो मस्त बहारें रैना अंधियारी बीत गई उमड़ा आता प्रेमसागर वो बातें सारी बीत गई बीत गए वो ख्वाब सुरीले नयनों की…

  • एक शक्की पत्नी | Shakki patni par kavita

    एक शक्की पत्नी ( Ek shakki patni )    एक शक्की पत्नि अपने पति पर शक करने लगी, मन ही मन में उसके बारे में नई नई कहानी गढ़ने लगी। मेरा पति शाम को ऑफिस से देर से क्यों आता है ? शायद किसी लड़की के साथ गुलछर्रे उड़ाता है। छुट्टी के दिन भी क्यो…

  • प्रदूषण की समस्या | Poem on Pollution in Hindi

    प्रदूषण की समस्या ( Pradushan ki samasya )  हिन्दुस्तान में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली हैं प्रदूषण का आगाज़, मजहबी इमारतों में शोर गुल सूरज से पहले है प्रदूषण का आगाज़।। शादी-ब्याह हो या सियासतदानों की रैली जुलूस तो है प्रदूषण, कलश यात्रा, शोभायात्रा में बजते डीजे होती ऊंची आवाज़ तो प्रदूषण।। तीनों सूबों और नजदीक इलाकों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *