लौट आओ ना | Laut Aao Na

लौट आओ ना

( Laut Aao Na )

हर आहट पे दिल को सुकून सा आता है,
तेरी यादों में अब भी दर्द जगमगाता है।
लौट आओ ना, ये दिल बस यही पुकार करे,
तुझ बिन हर एक लम्हा बस खाली सा रह जाता है।

हर ख्वाब में तुम ही हो, हर बात में तेरा ज़िक्र,
तेरे बिना हर खुशी का रंग फीका सा हो जाता है।
दिल की धड़कनों में अब भी तेरा ही शोर है,
तेरे लौटने की उम्मीद से ये दिल दिन-रात बांवला हो जाता है।

वो हंसी तेरी, वो बातों का तेरा अंदाज़,
इन सांसों में अब भी वो एहसास बस जाता है।
लौट आओ ना, ये दिल तुझसे बंधा हुआ है,
तुझ बिन हर एक सपना अब टूट कर बिखर जाता है।

हर आहट पे दिल को सुकून सा आता है,
तेरी यादों में अब भी दर्द जगमगाता है।

प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”

यह भी पढ़ें :-

यादों की चुभन | Yaadon ki Chubhan

Similar Posts

  • मतदान का महाकाज | Matdan ka Mahakaj

    मतदान का महाकाज ( Matdan ka mahakaj )    अंतःकरण स्वर से, मतदान का महाकाज हो शासनिक व्यवस्था लोकतंत्र, सदा शीर्ष नैतिक स्थान । अहम मतदाता सहभागिता, मौलिक अधिकार अनूप आह्वान। निष्पक्ष राष्ट्र प्रगति भाव सेतु, हर मत अंतर्निहित दिव्य राज हो । अंतः करण स्वर से, मतदान का महाकाज हो ।। जाति धर्म पंथ…

  • बाल मजदूरी | Bal majdoori par kavita

    बाल मजदूरी ( Bal majdoori )     खुद असमर्थ बनकर बच्चों से कराते मजदूरी। अगर कोई उठाये सवाल कहते यह हमारी मजबूरी।   बच्चे न माने तो  दिखाए चाकू छुरी। उनके उज्जवल भविष्य से खिलवाड़ कर कराते उनसे बाल मजदूरी।   जिन हाथों में कलम होनी चाहिए हे ! प्रभु कैसी है लाचारी? क्यो…

  • जीते जी मर जाना | Poem jeete jee mar jana

    जीते जी मर जाना ( Jeete jee mar jana )   मजबूरियों में ना जीना साहस तो दिखलाना। जिंदगी के सफर में प्यारे एक मुकाम बनाना।   मेहनत के दम से बढ़ना हाथ ना फैलाना। मांगन मरण समान है जीते जी मर जाना।   सेवा संस्कार बड़े सबका आदर सत्कार करो। बड़ों की सेवा करके…

  • चापलूसी एक हूनर | Chaaploosi par kavita

    चापलूसी एक हूनर ( Chaaploosi ek hoonar )    चापलूसी भी एक कला है जो चमचागिरी कहलाती। सत्ता के गलियारों में यह नेताओं को बहुत लुभाती।   चापलूसी के दम पे कई शहरों में ठेकेदार बन आए। मीठी चाशनी में भीगे शब्द मोहक रसीले खूब भाए।   चमचों की संगठित टीम चापलूसी का हुनर रखते।…

  • छाया है पिता

    छाया है पिता बरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। पिता करता नहीं दिखावा कोईआँसू छिपाता अन्तर में अपने।तोड़ता पत्थर दोपहर में भी वोचाहता पूरे हों अपनों के सपने।बरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। भगवान का परम आशीर्वाद हैपिता जीवन की इक सौगात है।जिनके सिर पे…

  • मां तुम रोना मत | Maa Tum Rona Mat

    मां तुम रोना मत अब अगले जन्म में मिलनामैं बनने वाला हूंकिसी भी पल लाशयहां बस जंगल हैंगीदड़, कुत्ते, भेड़ियों के दंगल हैंखा जाएंगे नोच –मेरी देह कोतुम्हें मेरी मिट्टी भी नहीं मिलेगीवहीं अपने खेत की मिट्टी कोअपनी छाती से लगा लेनामुझे राजा बेटा कह- कहपुकार लेनामां मत रोना मुझे याद हैजब पहली बार तुमखेत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *