Manav tan

मानव तन | Manav tan | Chhand

मानव तन

( Manav tan )

मनहरण घनाक्षरी

 

 

नश्वर सी यह काया,
तन को हमने पाया।
देह गात स्वरूप को,
दाग ना लगाइए।

 

कंचन सी काया मिली,
पंचतत्वों का शरीर।
मानव तन भाग्य से,
हरि कृपा पाइए।

 

चंद सांसों का खेल है,
आत्मा का जुड़ा है तार।
मानुष जन्म में मिला,
लोक सुख पाइए।

 

माटी का पुतला यह,
नाशवान है शरीर।
अभिमान जगत में,
कभी ना दिखाइए।

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

दिव्य अनुभूति | Divya anubhuti | Chhand

Similar Posts

  • कृष्ण लला | मत्त गयंद सवैया

    कृष्ण लला कृष्ण लला अवतार लिए चॅंहु ओर बजे दिन रैन बधाई। सोहर गाय रहीं ब्रज नार सुहासित नंद जसोमति माई। अंबर से अवनी तक आज सभी नर नार रहे मुसकाई। खेल रचा बिधना चुपचाप निहार रहे क्षण मंगलदाई।। केशव बेटिन को दुख कष्ट निवार धरा पर लाज बचाओ घूम रहे चॅंहु ओर दुशासन चीर…

  • छंद घूंघट | मनहरण घनाक्षरी

    छंद घूंघट मान मर्यादा रक्षक, लाज शर्म धर ध्यान। चार चांद सौंदर्य में, घूंघट सजाइए। प्रीत की फुहार प्यारी, सुंदर सुशील नारी। पिया मन को लुभाती, घूंघट लगाइए। गौरी का श्रृंगार सौम्य, प्रियतम मन भाए। गोरा मुखड़ा चमके, घूंघट दिखाइए। पहने परिधान वो, घर की पहचान वो। भारत की शान नारी, घूंघट हटाइए। कवि : रमाकांत…

  • शीश शिव गंगा धरे

    शीश शिव गंगा धरे ( छन्द : मनहरण घनाक्षरी ) शीश शिव गंगा धरे ,सब ताप कष्ट हरे,जप नाम शिव प्यारे ,तब होगे काम रे!!!शिव पूजा सब करे ,आज होगे काज पूरे,गुंज रहा सारी सृष्टी,सदाशिव नाम रे !!!शिव प्रिय बिल्व फल ,भक्त लिये गंगाजल,प्रभुल्लित सब चले ,शिवाप्रिया धाम रे !!!शिव पर्व जब आया ,साथ सब…

  • जीवन रंग उत्सव | Chhand Jeevan Rang Utsav

    जीवन रंग उत्सव ( Jeevan rang utsav ) सुख दुख आते जाते, पल पल ये मुस्काते। जीवन के रंग बहते, डुबकी लगाइए। कभी ख़ुशी कभी ग़म, जैसे बदले मौसम। पतझड़ बहारों में, आनंद उठाइए। मुस्कानों के मोती बांटे, बोल मीठे प्यार भरे। हिलमिल जिंदगी को, सुख से बताइए। कुदरत रंग भाये, चमन में बहार में।…

  • नवदुर्गा उपासना | Navdurga Upasana

    नवदुर्गा उपासना ( मनहरण घनाक्षरी ) नाम नव दुर्गा रूप, पूजे सुर मुनि भूपपहाड़ों वाली मां तेरा, शैलपुत्री नाम है। दूसरा अनूप रूप, ब्रह्मचारिणी है मैयाकमंडल कर तेरे, दूजे कर माल है। चंद्रघंटा रूप तेरा, तीसरा सलोना मैया,सिंह की सवारी तेरे, हाथ में कमान है। चौथा है कुष्मांडा रूप, पांचवा स्कंद मैया,छठा है कात्यायनी मां,…

  • डाकिया | Chhand dakiya

    डाकिया ( Dakiya ) मनहरण घनाक्षरी   सुख-दुख के संदेश, खुशियों के प्यार भरे। डाकिया का इंतजार, होता घर द्वार था।   आखर आखर मोती, चिट्ठी की महक लाता। इक छोटा पोस्टकार्ड, कागज में प्यार था।   चूड़ियों की खनक भी, बुलंदी की ललक भी। खुशियों का खजाना वो, डाक लाता जब था।   वो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *