Chhand Aaya Basant Suhana

आया बसंत सुहाना | Chhand Aaya Basant Suhana

आया बसंत सुहाना

( Aaya basant suhana )

 

जलहरण घनाक्षरी

 

आया बसंत सुहाना, उपवन महका रे।
झूम झूम नाचे गाते, सारे ठहर ठहर।

 

फागुन की मस्ती छाई, रूत ये सुहानी आई।
मधुमास महकता, आया लहर लहर।

 

सरसों लहलहाई, मस्त चली पुरवाई।
बहार ले अंगड़ाई, चली सहर सहर।

 

धमालो की थाप गूंजे, मस्तानों की टोली गाये।
होली पे रसिया गाये, गीत अधर अधर।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

आरंभ लिखूं या अंत लिखूं | Kavita Aarambh Likhoon ya Ant Likhoon

 

 

 

Similar Posts

  • ख्वाब और ख्वाहिशों के कैदी | Chhand

    ख्वाब और ख्वाहिशों के कैदी ( Khwab aur khwahishon ke kaidee )   विधा मनहरण घनाक्षरी   ख्वाबों खयालों में तुम, समय मत गंवाओ। हुनर प्रतिभा दिखा, सफलता पाईये।   स्वप्न सजाकर कोई, ख्वाहिशों के कैदी बने। हकीकत की धरा पे, संभल के जाइए।   तमन्ना और ख्वाहिशों, के जाल बुनते रहे। सपने सुरीले कोई,…

  • परीक्षा | Pareeksha par Chhand

    परीक्षा ( Pareeksha )   पग पग पे परीक्षा, लेता जग करतार। जीवन की डगर पे, चलिए जरा संभल। हर आंधी तूफां से, हर मुश्किल बाधा से। हौसलों की उड़ान से, छूएं आसमा नवल। घड़ी-घड़ी धैर्य धर, हर छानबीन कर। रिश्तो को परख कर, साख रखिए धवल। जिंदगी की जंग लड़े, उन्नति पथ पे बढ़े।…

  • शारदे माँ | लावणी छंद

    शारदे माँ ( 16 , 14 मात्रा पर यति अनिवार्य 30 मात्रा का मात्रिक छंद पदांत गुरु वर्ण अनिवार्य )    भक्तों को विद्या देती हैं , कृपा शारदे माँ करतीं । दिखा मार्ग भी उत्तम हमको , बुद्धि ज्ञान से ही भरतीं ।। अपने शरणागत पर माता , हाथ माथ अपना धरतीं । भक्तों…

  • जीत | Jeet

    जीत ( Jeet )  मनहरण घनाक्षरी   दिल जितना चाहो तो, दिल में उतर जाओ। मीठे बोल प्यार भरा, गीत कोई गाइए। जग जितना चाहो तो, लड़ना महासमर। शौर्य पराक्रम वीर, कौशल दिखाइए। औरों के हित जो लड़े, समर जीत वो जाते। दीन हीन लाचार को, गले से लगाइए। जीतकर शिखर से, अभिमान ना करना।…

  • पुराने खत | Purane khat | Chhand

    पुराने खत ( Purane khat )   मनहरण घनाक्षरी   पुरानी यादें समेटे, पुराने खत वो प्यारे। याद बहुत आते हैं, पल हमें भावन।   शब्द बयां कर जाते, मन के मृदुल भाव। मोती बन दमकते, लगे मनभावन।   खत पुराने मुझको, याद फिर दिला गए। भावन जमाना था वो, मौसम भी भावन।   सहेज…

  • गुरु महिमा गीत | ताटक छंद

    गुरु महिमा गीत गुरु महिमा है अगम अगोचर, ईश्वर शीश झुकाया है। पढ़ा लिखाकर हमको गुरु ने, काबिल आज बनाया है। समय समय अभ्यास कराते, गीत हमको सिखाते जी। सब शिष्यों को पारंगत कर, छंद विधान लिखाते जी। साहित्य सागर में मनवा ये, डुबकी बहुत लगाया है। पढ़ा-लिखाकर हमको गुरु ने, काबिल आज बनाया है।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *