मनमोहन | Manmohan

मनमोहन

मन को जिसने मोहा
जिसकी कार्य रही महान,
माॅं भारती की तुम संतान
हे मनमोहन तुम्हें बारम्बार प्रणाम।

अर्थशास्त्र के डॉक्टर बने
आरबीआई का गवर्नर,
भारत सरकार में वित्त मंत्री बने
प्रधानमंत्री भी रहे डट कर।

अयोग्यता नहीं तुम्हारे अंदर
नहीं रहा कोई दोष व्यक्तिगत,
कोयले की खान में बने रहे हिरा
चमकते रहे जिवन पर्यंत।

थे दूरदर्शी तुम्हारी योजनाओं ने
जन का कल्याण किया,
भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए
सुचना का अधिकार दिया।

सभी को शिक्षा दी
सभी को उचित स्थान दिया,
देश के उत्थान के लिए
बार-बार अपमान का घूंट पिया।

सत्ता का मित्र था कालयमन
देश के अंदर भी था विभीषण,
सभी को नियंत्रित किया
मौन रहकर हे मनमोहन
तुमने काम खूब किया।

तुम्हारे जाने से दुखी जन
दुखी है यह वसुंधरा
आने वाली समय तुम्हारी
गाएंगी गुण गाथा ।

मन को जिसने मोहा
जिसकी कार्य रही महान,
माॅं भारती की तुम संतान
हे मनमोहन तुम्हें बारम्बार प्रणाम।
हे मनमोहन तुम्हें बारम्बार प्रणाम।

नरेन्द्र कुमार
बचरी (तापा) अखगाॅंव, संदेश, भोजपुर (आरा),  बिहार- 802161

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