Maa

माँ सब दुनिया से प्यारी | Hindi Poem on Maa

माँ

( Maa )

 

माँ दुनिया का सबसे छोटा
शब्द सही
पर इससे बढ़कर शब्द नहीं

माँ तो इस दुनिया से बेखबर
मांँ होती सबसे अलग

बेटा बेटी में भेद न करती
प्रेम से हम सबको रखती

गर किसी पर दुख आ जाएं

उसका दिल तिलमिला जाएं

मांँ होती है हरा वृक्ष सदा
उसकी खुशियां बच्चों पर फिदा

बच्चों पर ना आने देती आँच
साफ दिल उसका जैसे कांँच

माँ के आँचल सा नहीं कोई सुख
मत देना कभी इसे कोई दुख

मांँ अब हमारी बारी
मांँ सब दुनिया से प्यारी
माँ सब दुनिया से प्यारी

Anita Singh

अनीता सिंह
शिक्षक, वि.ख.करेली
जिला-नरसिंहपुर

यह भी पढ़ें :

कविता कैसे लिखूं | Kavita Kaise Likhun

Similar Posts

  • युद्ध छीनता निवाला | Yuddh Chinnta Nivala

    युद्ध छीनता निवाला! ( Yuddh chinnta nivala )   अभी युद्ध चल रहा है जाने कौन किसको छल रहा है? जलने दो अभी मरने दो मासूमों को…. रहो मौन! देखो पहले, किधर खड़ा है कौन? नाप तौल कर बोलेंगे दुश्मनी किसी से थोड़ी न मोलेंगे! अपना कुछ जल नहीं रहा है? सुदूर यूक्रेन फिलिस्तीन में…

  • धनतेरस | Dhanteras par kavita

    धनतेरस ( Dhanteras ) धन की देवी लक्ष्मी, सुख समृद्धि भंडार। यश कीर्ति वैभव दे, महालक्ष्मी ध्याइये। नागर पान ले करें, धूप दीप से पूजन। दीप जला आरती हो, रमा गुण गाइए। रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ, सब सद्गुण की दाता। खुशियां बरसे घर, दीपक जलाइए। रोली मोली अक्षत ले, पूजन थाल सजाएं। मन वचन कर्म…

  • लोक आस्था का महापर्व छठ | Chhath puja poem in Hindi

    लोक आस्था का महापर्व छठ ( Lok Aastha ka Mahaparv Chhath )   लोक आस्था का महापर्व है, अद्भुत है फलदाई। तन मन की सब विपदा हरती, देवी छठी माई। चार दिनों तक चलता रहता, छठ का अनुष्ठान, संयम और नियमपूर्वक सब, होते विधि-विधान। भक्तिमय माहौल में पूजन- अर्चन है सुखदाई। लोक आस्था का महापर्व…

  • Poem in Hindi on Lekhni | लेखनी

    लेखनी ( Lekhni )    जाती ही नही लेखनी कल्पना के लोक मे कैसे करूं श्रृंगार,समय के इस वियोग मे खमोशभाईं बच्चे,बेटियां भी हैं सहमी हुई अधरों पर आए हंसी कैसे,अपनों के शोक मे सुना था की ,देश को मिल गई है आजादी पर,हुए हैं आज़ाद कौन इस मुल्क में सिसक रही झोपड़ी,आज भी महलों…

  • पल दो पल का शायर

    पल दो पल का शायर साहिर;वह लफ़्ज़ों का जादूगरपल दो पल का शायरउसने सहेवक़्त के सितमयहीं से बन गया उसका विद्रोही क़लम कौन भूल सकता हैउसकी ज़िन्दगी की “तल्ख़ियाँ”कौन भूल सकता हैउसके तसव्वर से उभरती “परछाइयाँ” हालांकि;लुधियाना शहर नेउसे कुछ न दियारुसवाई और बेरुख़ी के सिवाफिर भी;उसने लगा रखा अपने सीने सेइस दयार का नाम……

  • Hindi Kavita On Life | Hindi Kavita -मुसाफिर

    मुसाफिर ( Musafir ) … मुसाफिर तंन्हा हूँ मै, साथ चलोगे क्या, तुम  मेेरे। है मंजिल दूर, सफर मुश्किल , क्या साथ चलोगे मेरे। यही है डगर, एक मंजिल है तो फिर, साथ चलो ना, सफर कट जायेगा दोनो का, हमसफर बनोगे मेरे। … करेगे दुख सुख की बातें, बातों से खनक बढेगी। हमारे दिल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *